दो दिवसीय पूर्वांचल महोत्सव का सोमवार को समापन हुआ। पहले दिन के तर्ज पर दूसरे दिन भी सुरों की तान पर नृत्य की धमक देखने को मिली। अपने बीच की प्रतिभा को शानदार व दमदार प्रदर्शन के साथ मंच पर देख उपस्थित जन समूह हर्षित हो उठा।
शांति सेवा संस्थान की ओर से आयोजित इस महोत्सव के दूसरे दिन की शुरुआत वाराणसी के प्रियम एंड ग्रुप की गणेश वंदना प्रस्तुति से हुई। उसके बाद तो माहौल में जैसे संगीत घुल गया। सबसे पहले भोजपुरी गायक रवींद्र राज ने अपने जमीनी गीतों से लोगों को इस तरह जोड़ा कि वन्स मोर की आवाज आने लगी। उसके बाद फिर प्रियम ग्रुप मंच पर मौजूद था, लेकिन इस बार वह नृत्य के साथ।
‘मां शेरा वाली’ गीत पर ग्रुप के नृत्य ने सभी को झूमने के लिए मजबूूर कर दिया। हास्य कलाकार कुलदीप ने जब 60 तरह की आवाजें निकाली तो सब यह मानने को मजबूर हो गए कि अपने पूर्वांचल में बहुमुखी प्रतिभाओं की कमी नहीं। उसके बाद शुरू हुआ नृत्य और गायन प्रतियोगिता का सिलसिला। जो देर रात तक जारी रहा। विजेता प्रतिभागियों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। गायन प्रतियोगिता ‘मेरी आवाज सुनो’ में निर्णायक की भूमिका में डॉ. शरद मणि त्रिपाठी, डॉ. राजश्री बनर्जी, नंदू मिश्रा, राकेश श्रीवास्तव आदि रहे। आयोजक संस्थान के अध्यक्ष राजकुमार राय ने सभी के सहयोग का आभार जताया।
कार्यक्रम में गोरखपुर यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. अशोक कुमार, मेयर डॉ. सत्या पांडेय, कमिश्नर पी गुरुप्रसाद,, उद्योगपति श्याम बिहारी अग्रवाल, गजेंद्र त्रिपाठी, चेतना पांडेय, जगदीश सर्राफ, रीना जायसवाल, मनोज मिहिर, मुकेश श्रीवास्तव, संतोष मिश्रा, सुनील मिश्र, सुनील मांझी आदि मौजूद रहे।