एक मार्च से शुरू हो रही यूनिवर्सिटी व संबद्ध महाविद्यालयों की वार्षिक परीक्षा में इंतजाम को लेकर गोरखपुर यूनिवर्सिटी प्रशासन ने बृहस्पतिवार को केंद्राध्यक्षों की बैठक बुलाई। नकलविहीन परीक्षा के लिए कुलपति प्रो. अशोक कुमार ने सभी की जिम्मेदारी तय की। केंद्राध्यक्षों ने अपनी समस्याओं को यूनिवर्सिटी प्रशासन के सामने रखा, जिस पर उन्हें आश्वासन भी मिला।
संवाद भवन में आयोजित बैठक में कुलपति ने केंद्राध्यक्षों को बताया कि इस बार की परीक्षा में कुल तीन लाख 56 हजार विद्यार्थी पंजीकृत हैं। एक मार्च को होने वाली राष्ट्रगौरव परीक्षा में शामिल होने वाले विद्यार्थियों की तादाद एक लाख 85 हजार है। जब केंद्राध्यक्षों से उनकी समस्याएं पूछी गईं तो उन्होंने तमाम समस्याएं कुलपति और परीक्षा नियंत्रक के सामने रख दीं। इनमें प्रमुख समस्या समय से खर्च न मिलने की रही, जिसे जल्द से जल्द दूर करने की बात कुलपति ने कही। केंद्राध्यक्षों ने परीक्षा के बाद कॉपियों को नोडल सेंटर तक पहुंचाने के लिए रेट बढ़ोत्तरी की मांग भी की। उनका कहना था कि अभी तक यह रेट चार रुपये प्रति किलोमीटर है जबकि महंगाई को देखते हुए 10 रुपये प्रति किलोमीटर होनी चाहिए।
इस पर परीक्षा नियंत्रक डॉ. अमरेंद्र कुमार सिंह ने आश्वासन दिया कि यह मांग वित्त समिति की बैठक में रखी जाएगी। केंद्राध्यक्षों ने स्व-वित्तपोषित महाविद्यालयों के शिक्षकों को सचल दस्ते में ज्यादा से ज्यादा स्थान देने की मांग भी की। परीक्षा नियंत्रक ने केंद्राध्यक्षों को बताया कि इस बार महाविद्यालयों को प्रति परीक्षार्थी 35 रुपये प्रोसेसिंग फीस दी जाएगी। बैठक में 300 केंद्राध्यक्षों ने हिस्सा लिया।
नकल पर राज्यपाल टीम की धमकी
कुलपति ने नकलविहीन परीक्षा कराने के लिए बैठक के दौरान राज्यपाल की टीम को औचक निरीक्षण की धमकी केंद्राध्यक्षों को दी। उन्होंने बताया कि दीक्षांत समारोह के दौरान राज्यपाल नकल रोकने को लेकर हिदायत दे रहे थे और इस पर उनका विशेष ध्यान है। ऐसा भी हो सकता है कि राज्यपाल भी सचल दस्ता बनाएं, जो बिना किसी सूचना तक परीक्षा केंद्र पर पहुंचेगा और यह स्थिति बेहद संवेदनशील होगी।