कल की तस्वीर क्या होगी नहीं कहा जा सकता लेकिन स्थानीय निकाय खाते के एमएलसी के मौजूदा परिदृश्य में गोरखपुर-महराजगंज सीट पर सभी प्रमुख दल सपा को वॉकओवर का लाभ देते नजर आ रहे हैं। सपा को छोड़कर अन्य प्रमुख राजनीतिक पार्टियों की तरफ से अभी तक कोई प्रत्याशी चुनाव मैदान में नहीं उतारा गया है।
स्थानीय निकाय एमएलसी के 2010 में हुए चुनाव में न सिर्फ सूबे की सरकार की कमान बसपा के हाथ थी, बल्कि प्रदेश में दो को छोड़कर सभी सीटों पर बसपा के उम्मीदवार जीते थे। गोरखपुर-महराजगंज सीट पर गणेश शंकर पाण्डेय को सफलता मिली थी। इस दफा उन्होंने एमएलसी चुनाव के प्रति अनिच्छा जता दी तो बसपा के खाते से दूसरा कोई दमदार उम्मीदवार सामने नहीं आया। बसपाई खेमों में एक तरफ जहां इस बात की चर्चा है कि पार्टी मुखिया ने सिर्फ मजबूत स्थिति वाली सीटों पर ही उम्मीदवार उतारने को कहा है, वहीं चर्चा यह भी है कि लाल अमीन खां बसपा के प्रत्याशी होंगे।
दूसरे अहम दल कांग्रेस ने प्रत्याशी के नाम की जगह इस बात का साफ एलान किया है कि उनका कोई उम्मीदवार इस एमएलसी चुनाव के अखाड़े में नहीं उतरेगा। इसके पीछे गैर सपाई दूसरे मजबूत उम्मीदवार को और मजबूत करने की मंशा बताई है।
भाजपा की तरफ से जहां कई निर्वाचन क्षेत्रों के लिए एमएलसी उम्मीदवारों के नाम किस्तों में जारी किए गए हैं, वहीं अभी तक गोरखपुर-महराजगंज सीट को लेकर खामोशी है। चर्चा है कि भाजपा की तरफ से एक जनप्रतिनिधि की पत्नी को मैदान में उतारने का प्रयास किया गया था, पर उन्होंने इन्कार कर दिया। हालांकि भाजपा के क्षेत्रीय पदाधिकारी अपने पास उम्मीदवारी के दावेदारों की कमी न होने की बात कह रहे हैं लेकिन नामांकन प्रक्रिया शुरू हो जाने के बाद भी अधिकृत प्रत्याशी का नाम तय नहीं कर सके हैं। अब तक के परिदृश्य में सपा उम्मीदवार के मुकाबले सपा से ही रूठे या टूटे नेताओं के पर्चे दाखिल हुए हैं।