गोरखपुर सदर लोकसभा उपचुनाव में सपा-बसपा बल्कि यूं कहें कि विपक्षी गठबंधन का कड़ा इम्तिहान हआ। मतदान के नजारों ने साफ किया कि दलित वोटर को एकजुट करने में पार्टियां नाकाम रही हैं। गोरक्ष पीठाधीश्वर महंत योगी आदित्यनाथ और उनके विकास एजेंडे और कुछ गठबंधन से नाराजगी के चलते इस वर्ग के वोट भाजपा की झोली में जा गिरे।
पिपराइच के नार्मल स्कूल में वोट डालने पहुंचे वार्ड नंबर-1 मलिन बस्ती के विभूति भारती (35) ने कहा कि अब जाति-धर्म की राजनीति नहीं चलेगी। जो विकास की राह पर बढ़ेगा, उसे वोट मिलेगा। यही इस उपचुनाव में हुआ है। झोपड़ी में रह रहे थे। प्रधानमंत्री आवास मिला। सड़कें ठीक हुई हैं। मलिन बस्ती की धनवती, सुमित्रा और जिलेवा का तर्क भी कुछ ऐसा ही था। शहर विधानसभा क्षेत्र के वोटर और तुर्कमानपुर निवासी रामप्रीत ने कहा कि विकास के नाम पर वोट दिया है। मुख्यमंत्री यहीं के हैं। अच्छा काम कर रहे हैं। बशारतपुर के सीताराम ने बोले, पढ़ा-लिखा दलित सोच-समझकर वोट डाल रहा है। पार्टी के अंधभक्तों ने ही गठबंधन प्रत्याशी को वोट दिया होगा। पढ़े-लिखे ने विकास के नाम पर वोट दिया है। बता दें, सदर लोकसभा क्षेत्र में करीब 3 लाख दलित हैं।
मुस्लिम-यादव एकजुट
बसपा-सपा गठबंधन मुस्लिम और यादव वोटरों को अपने पक्ष में एकजुट करने में जरूर कामयाब दिखा। कांग्रेस को भी कम ही मुस्लिम वोट मिले। ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र के वोटर और मिर्जापुर निवासी रमजान, चौरी के नूर मोहम्मद और महमूद का कहना है कि कांग्रेस दमदारी से चुनाव नहीं लड़ रही थी। विकल्प गठबंधन ही था। इस बार वोट भी नहीं बंटा। यादव वोटरों ने भी सपा का साथ दिया। इस सीट पर करीब तीन लाख 10 हजार दलित-यादव वोटर हैं।
निषादों की भूमिका पर संशय
निषाद वोटरों को एकजुट करने के सपा के दावे पर संशय है। ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र के ट्रांसपोर्ट नगर महेवा के अक्षय निषाद और रक्षा निषाद ने कहा कि निषादों पर सपा सरकार ने गोलियां चलवाई थीं। इसलिए सपा से समझौता निषाद पार्टी को भारी पड़ेगा। कैंपियरगंज क्षेत्र के बरईपार गांव निवासी रामहित निषाद, राजेंद्र निषाद और बहगोलिया के शिव प्रसाद ने कहा कि यहां के महंत योगी आदित्यनाथ अब मुख्यमंत्री हैं। उनका सम्मान बचाने और विकास के नाम पर वोट दिया।
सवर्ण भाजपा के साथ
लोकसभा उपचुनाव में ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, सैंथवार, कायस्थ के ज्यादातर वोट भाजपा में गए हैं। इन वोटरों का मानना है कि भाजपा को हराने के लिए सब एकजुट हो रहे हैं। यदि वे हावी हुए तो विकास की राजनीति प्रभावित होगी। सदर लोकसभा क्षेत्र में इन वोटरों की संख्या करीब 8 लाख 15 हजार है।
भाजपा-सपा की लड़ाई
सदर सीट की लड़ाई सपा और भाजपा के बीच सिमट गई है। मतदान केंद्रों पर वोटरों से बातचीत के बाद जो रुझान मिले हैं, उसके मुताबिक कांग्रेस लड़ाई में नहीं है। पहले कांग्रेस प्रत्याशी डॉ. सुरहीता करीम को लड़ाई में बताया जा रहा था लेकिन सपा-बसपा के गठबंधन से समीकरण बदले। ज्यादातर मुस्लिम वोटरों ने कांग्रेस से किनारा कर लिया। सवर्ण-ओबीसी वोट बहुत मिलेगा, इसकी उम्मीद भी वोटरों ने कम ही जताई।