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लोहिया गांवों में भी अफसरों के ‘आंकड़ों का खेल’

Tue, 17 May 2016 08:19 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर
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गांव - फोटो : Bureau
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प्रदेश सरकार की सबसे महत्वपूर्ण योजनाओं में शामिल लोहिया गांव भी अफसरों के आंकड़ों के खेल से नहीं बच सका। कागज पर वर्ष 2012-13 और 13-14 के मंडल के जिन तमाम लोहिया गांवों को संतृप्त बता दिया गया, जांच में वहां कई योजनाएं अधूरी पाई गईं। कहीं शौचालय अधूरा मिला तो कहीं लोहिया आवास और कहीं इंडिया मार्का हैंडपंप। कमिश्नर पी. गुरुप्रसाद के निर्देश पर मंडल स्तरीय 40 अफसरों की टीम की जांच में यह खुलासा हुआ।
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कमिश्नर ने सभी डीएम से इन खामियों को दुरुस्त कराने के साथ ही संबंधित विभाग और सत्यापन करने वाले अफसरों पर कार्रवाई कर आख्या उपलब्ध कराने को कहा था, मगर किसी भी जिले से समय पर आख्या नहीं मिली जिसपर सभी डीएम को मंगलवार को रिमाइंडर भेजा गया है। जांच टीम ने 2012-13 से लेकर 2014-15 तक के लोहिया गांवों की जांच की है। इस दौरान संचालित करीब 40 योजनाओं की पड़ताल की गई। मंडल के सभी जिलों के लोहिया गांवों में सबसे ज्यादा खामी स्वच्छ शौचालयों में पाई गई।

कहीं मौके पर 20 फीसदी शौचालय बने नहीं पाए गए तो कहीं 40 फीसदी, जबकि कागज में इन सभी गांवों को संतृप्त बताया गया। सर्वाधिक इंडिया मार्का हैंडपंप प्राथमिक विद्यालयों में खराब मिले। 2013-14 में स्वीकृत हुए आंगनबाड़ी केंद्र भी अभी तक पूरे नहीं हो सके हैं। कुशीनगर में तो 2013-14 के कई लोहिया गांव भी अभी तक पूरे नहीं पाए गए। जांच रिपोर्ट के मुताबिक गोरखपुर के 12 लोहिया गांव, महराजगंज में 17, कुशीनगर में 18 तथा देवरिया के तीन लोहिया गांव में खामियां पाई गई हैं।
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