विधि द्वितीय सेमेस्टर के एससी-एसटी विद्यार्थियों का रिजल्ट विवाद समाप्त हो गया है। विद्यार्थियों के आक्रोश को देखते हुए यूनिवर्सिटी प्रशासन ने लंबी कवायद के बाद रिजल्ट निकाल देने का फैसला लिया है। शनिवार को इसे लेकर बुलाई गई परीक्षा समिति ने इस निर्णय पर मुहर लगा दी है। रिजल्ट निकाले जाने की सूचना मिलते ही विद्यार्थियों ने यूनिवर्सिटी परिसर में जमकर खुशी मनाई और एक-दूसरे का मुंह मीठा कराया।
शुल्क प्रतिपूर्ति को लेकर विधि द्वितीय सेमेस्टर के एससी/एसटी विद्यार्थियों का रिजल्ट पिछले दिनों यूनिवर्सिटी प्रशासन ने रोक दिया। वजह की जानकारी जब विद्यार्थियों को हुई तो वे आंदोलन पर आमादा हो गए। पहले छिटपुट प्रदर्शन का सिलसिला चला लेकिन जब बात नहीं बनी तो एक सप्ताह पहले विद्यार्थियों ने यूनिवर्सिटी के प्रशासनिक भवन पर ताला जड़कर धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। दो दिन तक तो यूनिवर्सिटी प्रशासन ने कोई सुध नहीं ली लेकिन जब तीसरे दिन विद्यार्थी उग्र हो गए तो प्रॉक्टर और अधिष्ठाता छात्र कल्याण (डीएसडब्ल्यू) को मय पुलिस फोर्स धरना स्थल पर पहुंचना पड़ा। पहले तो दोनों अधिकारियों ने विद्यार्थियों को समझा-बुझाकर घर भेजने की कोशिश की लेकिन जब बात नहीं बनी तो उन्हें रिजल्ट निकालने का आश्वासन देना पड़ा। इसके बदले डीएसडब्लू ने विद्यार्थियों ने इस बात का शपथ पत्र लिया कि शुल्क प्रतिपूर्ति के संबंध में शासन का जो निर्णय होगा, वह विद्यार्थियों को मान्य होगा। जब विद्यार्थी तत्काल रिजल्ट घोषित करने की बात कहने लगे तो उन्हें 26 मार्च तक इंतजार करने को कहा गया। जिसमें परीक्षा समिति द्वारा इस संबंध में निर्णय लिया जाना था। े
ये था मामला
आवेदन फार्म भरने के दौरान एससी/एसटी विद्यार्थियों को 25 नंबर के नान रिफंडेबल अनुमोदित शुल्क वाले कॉलम में 3665 रुपये शुल्क भरना था लेकिन केवल आठ विद्यार्थियों ने ही इसे सही भरा था। बाकी सभी विद्यार्थियों ने इसकी जगह 172 रुपये शुल्क भरा। जो फीस माफी के बाद का शुल्क होता है। ऐसे में समाज कल्याण विभाग की ओर से इन विद्यार्थियों की फीस यूनिवर्सिटी को नहीं मिल सकी। जिसके चलते यूनिवर्सिटी ने विद्यार्थियों ने उस शुल्क की प्रतिपूर्ति किये जाने का निर्देश दिया और तब तक रिजल्ट न निकाले जाने का फैसला किया। लेकिन विद्यार्थी इस बात पर अड़ गए कि यह उनकी गलती नहीं है, ऐसे में उनका रिजल्ट घोषित किया जाए। जब मामला फंस गया तो यूनिवर्सिटी ने इस समस्या से शासन को अवगत कराया और इस पर निर्णय दिए जाने की मांग की। अब यूनिवर्सिटी को शासन की ओर से शुल्क प्रतिपूर्ति का इंतजार है। यदि शासन ने यूनिवर्सिटी की शुल्क प्रतिपूर्ति देने का निर्णय लिया, तब तो ठीक है लेकिन यदि ऐसा नहीं हुआ तो विद्यार्थियों को शुल्क प्रतिपूर्ति जमा करनी होगी। इसी का शपथ पत्र विद्यार्थियों से लिया जा रहा है।
शुल्क प्रतिपूर्ति से संबंधित शपथ पत्र पर कुछ ही विद्यार्थियों ने हस्ताक्षर किया है। सभी विद्यार्थी इस पर हस्ताक्षर कर दें, इसके लिए यूनिवर्सिटी की ओर से 29 मार्च तक समय दिया गया है। हस्ताक्षर के बाद रिजल्ट घोषित कर दिया जाएगा।
डॉ. सुधीर कुमार श्रीवास्तव, अधिष्ठाता, छात्र कल्याण