पिछले 25 सालों में हुए सभी बैनामों के दस्तावेजों को सुरक्षित किया जाएगा। बैनामों का स्कैन कर उसकी सॉफ्ट कॉपी तैयार की जाएगी, ताकि लिखित दस्तावेजों के खराब होने या गायब होने पर उसकी कॉपी का विकल्प मौज्ूाद रहे। यहीं नहीं, कंप्यूटर में दर्ज होने पर इन दस्तावेजों को आसानी से खोजा भी जा सकेगा।
इसी कवायद के मद्देनजर शासन ने सभी एआईजी से संबंधित जिलों के सभी रजिस्ट्री दफ्तरों में वर्ष 1990 से लेकर अब तक हुए बैनामों के आंकड़ों की संख्या मांगी है। ऐसा इसलिए ताकि यह मालूम चल सके कि पूरे सूबे में कितने बैनामों की स्कैनिंग होनी है। इसी आधार पर टेंडर निकाला जाएगा। शासन के इस निर्र्देश के मद्देनजर बुधवार को रजिस्ट्री दफ्तर में भी अफसर-कर्मचारी आंकड़े जुटाने में लगे रहे।
एआईजी स्टांप रामशंकर सिंह ने बताया कि बैनामों की स्कैनिंग के लिए शासन स्तर से जगह मांगी गई है। टेंडर के बाद स्कैन करने वाली फर्म मुख्यालय पर ही अपना दफ्तर खोलकर काम करेगी। सभी जिलों से यहां दस्तावेज मंगाए जाएंगे और उसे स्कैन किया जाएगा। एक जिले का काम खत्म होने पर ही दूसरे जिलों के बैनामों की स्कैनिंग होगी।