इस बीच मंडल के विभिन्न जनपदों से छुट्टा गोवंशीय पशुओं को गोसदन लाए जाने लगा और अगले कुछ महीनों में गोसदन में पशुओं की संख्या दो हजार के करीब पहुंच गईं। इस बीच आनन-फानन में तीन नये शेड भी बने और नए गो सेवकों की नियुक्ति भी हुई। लिहाजा खेती भी बढ़ी और 180 एकड़ में परम्परागत खेती की जाने लगी। इस बीच फरवरी 2019 में डीएम ने गोसदन प्रबंधक को हटा दिया।
अब पूरी व्यवस्था की कमान अफसरों ने खुद संभाल ली। इस बीच जून 2019 के पहले सप्ताह में हुई 60 से अधिक गोवंशीयों के मौत के बाद व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए डीएम अमरनाथ उपाध्याय ने गोसदन का कामकाज देख रहे एसडीएम निचलौल देवेन्द्र कुमार का स्थानांतरण कर दिया। उनके स्थान पर सत्यम मिश्रा को निचलौल का नया एसडीएम बनाया गया। एसडीएम निचलौल ने डीएम की पहल पर व्यवस्था के बेहतरी के नाम पर करीब 148 एकड़ भूमि महज दो व्यक्तियों को आवंटित कर दिया।
मोटी रकम देकर भूमि का आवंटन लेने वाले नामदारों ने गोसदन की शर्तों को दरकिनार कर गोसदन की भूमि पर व्यवसायिक खेती शुरु कर दी है। इधर खेती का रकबा बढ़ता गया, उधर गोवंशीयों की सांसे थमती चली गईं। सीएम के आदेश पर मामले की जांच कर रहे कमिश्नर जयंत नार्लिकर ने गोसदन के सभी अभिलेखों को तलब कर अपनी कस्टडी में ले लिया है। जांच के क्रम में मंगलवार को बीडीओ निचलौल रविंद्र वीर को भी निलंबित कर दिया गया हैं।