... तो सीबीएसई, आईसीएसई स्कूलों में नहीं पढ़ती हैं बेटियां
गोरखपुर। कन्या सुमंगल योजना के आंकड़ों की बात करें तो ऐसा प्रतीत होता है कि जिले के सीबीएसई और आईसीएसई से संचालित विद्यालयों में कोई बेटियां पढ़ाई ही नहीं कर रही हैं। जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में दर्ज आंकड़े तो यही कहानी बयां कर रहे हैं। तभी तो इस योजना का लाभ लेने के लिए दोनों ही बोर्ड से संचालित किसी भी विद्यालय संचालक ने छात्राओं की जानकारी नहीं दी है। विभाग की ओर से उनसे लगातार पत्राचार तो किया जा रहा है मगर स्कूल उसका भी कोई जवाब देना मुनासिब नहीं समझ रहे हैं। नतीजन योजना का लाभ जिले की हजारों बेटियों को नहीं मिल पा रहा है।
जिले में सीबीएसई से संचालित विद्यालयों की संख्या 105 और आईसीएसई के विद्यालयों की संख्या 18 है। इन विद्यालयों में कक्षा एक से लेकर बारहवीं तक कम से कम 42 हजार छात्राएं अध्ययन कर रही हैं। इतनी अच्छी खासी संख्या होने के बाद भी प्राइवेट स्कूलों की ओर से पढ़ने वाली छात्राओं की जानकारी जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय को नहीं मुहैया कराई जा रही है।
यूपी बोर्ड: 200 छात्राओं ने कराया पंजीकरण
कन्या सुमंगल योजना के अंतर्गत यूपी बोर्ड से संचालित विद्यालयों के साथ ही स्नातक में पढ़ने वाली 1200 छात्राओं ने अब तक ऑनलाइन पंजीकरण कराया है। इनके दस्तावेजों के सत्यापन का काम जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय से पूरा किया जा चुका है। वहीं, सीबीएसई और आईसीएसई से संचालित विद्यालयों में अभी किसी छात्रा का पंजीकरण नहीं हो सका है।
क्या है कन्या सुमंगल योजना
सीएम योगी आदित्यनाथ ने धनतेरस के मौके पर बेटियों की सुरक्षा और संवर्द्धन के लिए कन्या सुमंगल योजना शुरूआत की। इसके अंतर्गत बालिका के जन्म पर दो हजार, एक वर्ष के टीकाकरण पर एक हजार, कक्षा एक में प्रवेश पर दो हजार, कक्षा छह में प्रवेश पर दो हजार, कक्षा नौ में प्रवेश पर तीन हजार, स्नातक व दो वर्षीय डिप्लोमा कोर्स के लिए पांच हजार रुपये की धनराशि मिलेगी।
कोट
कन्या सुमंगल योजना के अंतर्गत सीबीएसई और आईसीएसई बोर्ड से संचालित विद्यालयों में पढ़ने वाली छात्राओं की ओर से पंजीकरण नहीं कराया जा रहा है। सभी स्कूल संचालकों को चेतावनी दी गई है। ऐसे विद्यालयों को चिन्हित कर कार्रवाई की जाएगी।
- ज्ञानेंद्र सिंह भदौरिया, जिला विद्यालय निरीक्षक