पूर्व प्रधान से दस लाख की रंगदारी मांगने के चार आरोपी गिरफ्तार
गोरखपुर। सहजनवां इलाके के पूर्व प्रधान वीरेंद्र मिश्रा से फोन पर दस लाख रुपये की रंगदारी मांगने के चार आरोपियों को पुलिस ने दबोच लिया। पूर्व प्रधान के सुरक्षा गार्ड रहे गांव के ही दो युवकों ने दोस्तों के साथ मिलकर यह साजिश रची थी। पुलिस ने आरोपियों के पास से रंगदारी मांगने में इस्तेमाल मोबाइल व सिम कार्ड को बरामद कर लिया। पुलिस की जांच में सामने आया है कि मोबाइल फोन व सिम को चार महीने पहले चोरी किया गया था। हालांकि मोबाइल फोन गायब होने के बाद भी सिम कार्ड नहीं बंद कराने को लेकर पुलिस जांच कर रही है।
जानकारी के मुताबिक आरोपियों की पहचान सहजनवां के टिकरिया निवासी उपेंद्र निषाद, दुर्गेश निषाद, गीडा के खरेला निवासी मंदीप सिंह, खजनी के नएपुरा निवासी अनिल प्रजापति के रूप में हुई है। एसपी क्राइम अशोक कुमार वर्मा, सीओ क्राइम प्रवीण सिंह तथा सीओ कैंपियरगंज दिनेश सिंह ने संयुक्त प्रेसवार्ता कर घटना का पर्दाफाश किया। अफसरों ने बताया कि आरोपियों को मुड़कटिया तिराहा के पास से पकड़ा गया।
एसपी ने बताया कि सहजनवां के टिकरिया गांव निवासी पूर्व प्रधान वीरेंद्र मिश्र से 12 नवंबर को दस लाख की रंगदारी मांगी गई थी। 24 घंटे में पैसा न देने पर हत्या की धमकी दी गई थी। उस दिन वह लखनऊ से लौट रहे थे। जानकारी के बाद केस दर्ज कर सर्विलांस व अन्य माध्यमों से जांच शुरू हुई। जांच में पूर्व प्रधान के गांव के उपेंद्र निषाद और दुर्गेश निषाद का नाम सामने आया। दोनों पूर्व प्रधान के साथ प्राइवेट सुरक्षागार्ड के रूप में काफी दिनों तक साथ रहे थे। पुलिस ने उन्हें पकड़ा तो पूछताछ में गीडा थाना क्षेत्र के खरैला गांव निवासी मंदीप सिंह तथा खजनी के नएपुरा गांव निवासी अनिल प्रजापति उर्फ गोलू का भी नाम आया। चारों ने पूछताछ में रंगदारी मांगने की बात कबूल की। मंदीम ने चंदन सिंह के नाम पर फोन किया था। गिरफ्तारी करने वाली टीम में सहजनवां थानेदार दिनेश कुमार मिश्रा, स्वॉट प्रभारी सादिक परवेज, सर्विलांस प्रभारी धीरेंद्र कुमार आदि शामिल थे।
पहले भी जेल जा चुके है आरोपी
सीओ क्राइम प्रवीण सिंह ने बताया कि हत्या सहित अन्य मामलों में चारों आरोपी पहले भी जेल जा चुके हैं। चोरों की जेल में ही मुलाकात हुई थी। जमानत पर बाहर आने के बाद भी उनकी दोस्ती कायम रही और पैसे के लिए रंगदारी का प्लान बनाया था। सीओ ने बताया कि अभी तक की जांच में यही पता चला कि रंगदारी मांगने में उन्होंने चंदन के नाम का इस्तेमाल किया था। चंदन से उनका कोई नाता नहीं है। हालांकि अभी जांच जारी है।
सुरक्षा देखकर डर गए थे आरोपी
सीओ प्रवीण सिंह ने बताया कि पूर्व प्रधान को सुरक्षा मिलने के बाद से ही गांव के आरोपियाें को संदेह हो गया था कि पूर्व प्रधान ने पुलिस को सूचना दे दी है। फिर मीडिया में खबर आने के बाद वे भागने की तैयारी में थे।
होमगार्ड का पुत्र है मंदीप
खरैलना निवासी मंदीप सिंह के पिता वीरेंद्र सिंह होमगार्ड हैं। पहले कुछ मामलों में उसे यह लगता था कि पिता उसे बचा लेंगे, लेकिन हत्या के मामले में जेल जाने के बाद पिता ने भी उसका साथ छोड़ दिया था।