मजिस्ट्रेटी जांच में भी सामने आ रहा बड़ा फर्जीवाड़ा
गोरखपुर। फर्जी शस्त्र लाइसेंस मामले में पुलिस अफसरों के बाद अब पहली बार मजिस्ट्रेटी जांच कर रही कमेटी ने भी शनिवार को कई महत्वपूर्ण खुलासे किए हैं। अब तक की हुई जांच में कमेटी को कई फर्जी लाइसेंस मिले हैं। इनमें 60 तो सिर्फ गोरखनाथ थाना क्षेत्र के रहने वालों के नाम से बने हैं। कमेटी में शामिल ज्वाइंट मजिस्ट्रेट प्रथमेश कुमार ने बताया कि जांच चल रही है। अभी फर्जी लाइसेंस की वास्तविक संख्या तो बता पाना मुश्किल है मगर इनकी संख्या काफी होने की आशंका है। उन्होंने बताया कि इस खेल में कलेक्ट्रेट के भी कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत है। सभी के खिलाफ गहनता से जांच चल रही है। कोई बचेगा नहीं । ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने बताया कि ज्यादातर हेरा फेरी 2009-10 के बीच के अभिलेखों में मिली है। ज्यादातर जितने भी फर्जी लाइसेंस जारी किए गए हैं उनके जारी होने की तिथि 2009 और 2010 ही है। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन आईडी से थानावार सभी अभिलेखों का सत्यापन कराया जा रहा है। सभी शस्त्र विक्रेताओं के क्रय-विक्रय से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच चल रही है।
0
अभिलेखों पर जांच समिति का हक: ज्वाइंट मजिस्ट्रेट
जांच कमेटी के सदस्य ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने बताया कि असलहे से संबंधित सभी अभिलेख कमेटी के कब्जे में हैं। अब उस पर पूरी तरह से जांच समिति का ही अधिकार है। मामले की जांच कर रही पुलिस को अगर कोई रिकार्ड चाहिए तो उन्हें संबंधित की फोटो कॉपी दी जाएगी। इन रिकार्ड को देने का अधिकार भी कमेटी का होगा।
0
कर्मचारियों को अभिलेखों की कस्टडी से हटाया गया
ज्वाइंट मजिस्ट्रेट प्रथमेश कुमार ने बताया कि शस्त्र लाइसेंस से संबंधित सभी कर्मचारियों को अभिलेखों की कस्टडी से हटा दिया गया है। डीएम के. विजयेंद्र पांडियन की तरफ से 30 अगस्त को ही वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी गिरीश कुमार सिंह को अग्रिम आदेश तक के लिए शस्त्र पटल से संबद्ध कर दिया है। जांच पूरी होने तक उनकी निगरानी में ही शस्त्र अनुभाग के सभी काम होंगे।