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ज्यादातर अवैध लाइसेंस 2009 में बालिग हुए शौकीनों के ही

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ज्यादातर अवैध लाइसेंस 2009 में बालिग हुए शौकीनों के ही
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रोहित सिंह
गोरखपुर। शहर में अवैध लाइसेंस के खेल में 2009 में जितने लोग बालिग हुए थे, उनके फर्जी लाइसेंस ही बनाए गए। 2017 के बाद भी जितने लाइसेंस गलत तरीके से बनाए गए उन्हीं के हैं जो 2009 में बालिग हुए थे। यह जानकारी उन लोगों से मिली है, जिन्हें फर्जी लाइसेंस बनाने वाले गिरोह के लोगों ने संपर्क किया था।
सभी हैरान हैं कि आखिर फर्जी लाइसेंस बनाने का ख्याल दिमाग में कैसे आया? सूत्रों की मानें तो पूरा खेल 2007 में शुरू हुआ। इसी दौरान शस्त्र लाइसेंस डीएम के विवेकाधिकार पर निर्भर था। हर आवेदनकर्ता को दरकिनार कर दिया जाता था। उस समय तमाम लोग किसी भी तरह से लाइसेंस बनवाने के लिए भटक रहे थे। माना जा रहा है कि इन लोगों से लाइसेंस के लिए मुंह मांगी रकम मिलने की बात सुनकर ही हथियार बेचने और असलहा बाबू कार्यालय में बैठे कुछ लोगों के दिमाग में यह फर्जीवाड़ा जन्मा। उस समय किसी भी तरह से लाइसेंस के इच्छुक लोगों को यह समझाया गया कि हम गोपनीय तरीके से डीएम से लाइसेंस बनवा रहे हैं, यह बात बाहर नहीं जानी चाहिए। इस फर्जीवाड़े को बेहद ही सावधानी के साथ किया गया।
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सूत्रों की मानें तो लाइसेंस बनवाने का पूरा काम गोपी करता था। गन हाउस से क्लाइंट की जानकारी शस्त्र विभाग में देने की जिम्मेदारी इसी की थी। वहां फर्जी तरीके से लाइसेंस बनता था। इसके बाद रजिस्टर मेनटेन करने से लेकर असलहा खरीदवाने का काम गोपी के जिम्मे था। बाद में धड़ाधड़ लाइसेंस बनवाने वाले मिलने लगे तो इनके मन बढ़ गया और इन्होंने यह बता कर लाइसेंस बनवाना शुरू दिया कि लाइसेंस फर्जी है, लेकिन हथियार खरीद के बाद वे पकड़ में नहीं आएंगे। यहां तक दावा किया गया था कि लाइसेंस पर यूनिक आईडी भी ऐसे ग्राहकों की चढ़ाई जा रही है कि जिनकी मौत हो गई। यही नहीं 2009 के पहले के ही सभी यूनिक आईडी कोड पर ही लाइसेंस बनाए गए थे। वहीं चर्चा है कि भाजपा शासन काल में बनाए गए सभी फर्जी लाइसेंस के रिकार्ड को ही गायब किया गया है। अब तक जो लोग भी पकड़े गए हैं, 2009 के आधारकार्ड पर ही उनके लाइसेंस बने हैं। इसके अलावा जिन्होंने हाल फिलहाल के दिनों में असलहा खरीदा है उनपर भी शिकंजा कसा गया है।
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0 आरोपी के रसूख की चहूंओर चर्चा
रवि गन हाउस के संचालक या गिरफ्तार बेटे रवि पांडेय के रसूख की अब चर्चा आम हो गई है। पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई, रवि की गिरफ्तारी या आत्मसमर्पण, सील तोड़ने वाले दिन रवि के लिए पुलिस कर्मियों के बोल, इसकी चर्चा सब तरफ है। चर्चा तो यहां तक है कि इस मामले में फंसे बड़े सफेदपोशों के अलावा अन्य रसूख वालों को पहले ही पता चल गया था कि 2017 के बाद के रिकार्ड में खेल कर दिया गया है। अगर वाकई खेल हुआ तो किस स्तर पर यह अपने आप में एक पहेली है और पूरे मामले में कार्रवाई की नियत भी इसी में छुपी है।
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