पुलिस और प्रशासन की नजर में गुनहगार असलहा बाबू अलग-अलग
गोरखपुर। फर्जी शस्त्र लाइसेंस के खेल में प्रशासनिक मशीनरी की संलिप्तता को लेकर जिला प्रशासन और पुलिस के अलग-अलग राग हैं। पुलिस और मास्टरमाइंड माना जा रहा प्रकाश नारायण पांडेय का बेटा रवि पांडेय आरोपों में घिरे असलहा बाबू राम सिंह की संलिप्तता बता रहा है । इसके उलट प्रशासन का मानना है कि हाल ही में हटाए गए पूर्व असलहा बाबू का इस खेल में हाथ है। यानी इस मामले में जो असलहा बाबू आरोपों में घिरा दिख रहा है, वह पुलिस के लिए कोई दूसरा और प्रशासन के लिए कोई और है।
डीएम के विजयेंद्र पांडियन के पास भी पूर्व असलहा बाबू के खिलाफ ही पुख्ता साक्ष्य हैं। यही नहीं इस पूरे मामले में अब जितने लोग पकड़े गए रवि पांडेय को छोड़ सभी ने पूर्व असलहा बाबू का ही नाम लिया है। इसकी ऑडियो और वीडियो भी डीएम तक पहुंची है। इनमें से एक अभियुक्त विजय प्रताप ने इसी पूर्व असलहा बाबू को कार गिफ्ट की थी। खुद डीएम भी यह कह चुके हैं कि उनके स्तर से कराई गई जांच में पूर्व असलहा बाबू का नाम सामने आया है। मजिस्ट्रेटी जांच चल रही है कि जांच पूरी होने के साथ ही और भी कुछ पुख्ता साक्ष्य मिल जाएंगे, फिर उसके नाम को सार्वजनिक कर दिया जाएगा। डीएम ने यह भी संकेत दिए कि इस पूर्व असलहा बाबू समेत कलेक्ट्रेट के करीब आधा दर्जन कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर नजीर पेश की जाएगी। इस मामले में असलहा बाबू राम सिंह का भी पक्ष जानने की कोशिश की गई मगर संपर्क नहीं हो सका। उनका पक्ष आने पर प्रकाशित किया जाएगा।