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संगठित गिरोह की तर्ज पर चल रहा था फर्जी लाइसेंस का खेल

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संगठित गिरोह की तर्ज पर चल रहा था फर्जी लाइसेंस का खेल
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गोरखपुर। रवि प्रकाश पांडेय की गिरफ्तारी और पुलिस की जांच से अब सामने आ गया है कि फर्जी लाइसेंस बनाने का काम एक संगठित गिरोह के तर्ज पर चल रहा था। जिसमें एक शख्स लाइसेंस बनवाने का ठेका लेता था तो दूसरा बिचौलिया बनकर असलहा दफ्तर के लोगों से संपर्क करता था। फिर वहां पर बैठे कुछ असली और नकली लोगों की मदद से यह पूरा खेल होता था।
पुलिस अब तक इस मामले में सात लोगों को जेल भेज चुकी है और हर गिरफ्तारी के बाद कुछ नए नाम सामने आए हैं, जिनकी तलाश की जा रही है। पुलिस की ओर से जांच कर रही एसआईटी खुद ही यह मान चुकी है कि बड़ी संख्या में फर्जी लाइसेंस बने हैं और असलहे भी खरीदे गए हैं। हालांकि इसका कोई रिकॉर्ड नहीं होने की वजह से फर्जी लाइसेंस की सटीक संख्या सामने नहीं आ सकी है।
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पूर्वांचल में असलहे का शौक पुराना है। इसी शौक का फायदा रवि गन हाउस के मालिक और असलहा दफ्तर के कुछ कर्मचारियों ने उठाया। पुलिस ने जिन लोगों को गिरफ्तार किया है, उन्होंने यही बताया है कि एक लाइसेंस को बनवाने के लिए डेढ़ से दो लाख रुपये वसूले जाते थे। इसमें सबका हिस्सा होता था। 1.20 लाख रुपये तो असलहा दफ्तर के कुछ कर्मचारियों को भेजे जाते थे। इस प्रक्रिया के बाद ही फर्जी लाइसेंस तैयार हो जाता था। लाइसेंस रवि गन हाउस से दिए जाते थे। ज्यादातर असलहे रवि गन हाउस से ही खरीदने की शर्त होती थी। हालांकि पुलिस इस पूरे प्रकरण पर बड़ी सावधानी बरत रही है। पुलिस का मानना है कि सबूत आने के बाद ही लिखा पढ़ी होगी और उसके बाद ही नाम सार्वजनिक किए जाएंगे।
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रईसजादों को बनाया निशाना, ज्यादातर बोले शौक में फंस गए
फर्जीवाड़ा करने वालों ने युवा रईसजादों को निशाना बनाया था, जो कि आसानी से पैसे का भुगतान कर सकते थे। अब तक मामले में सात आरोपी गिरफ्तार करके जेल भेजे जा चुके हैं। इसमें से ज्यादातर की प्रोफाइल अच्छी है। प्रापर्टी डीलर तनवीर, विजय, बिचौलिया गोपी, दरोगा के बेटा विकास, बिंदास होटल का मालिक प्रणय सिंह, प्रापर्टी डीलर शमशाद को जेल भेजा जा चुका है। सभी ऐसे हैं, जो आसानी से डेढ़ से दो लाख रुपये खर्च कर सकते हैं। पुलिस की पूछताछ में रईसजादों ने स्वीकार किया था कि वे शौक के चक्कर में इसमें फंस गए। उन्हें इस बात की उम्मीद ही नहीं थी कि मामला खुलेगा और जेल जाएंगे। शौक अपराधी बना देगा, ऐसा नहीं सोचा था।
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