परीक्षा के दौरान पेपर आउट की बढ़ती घटनाओं को रोकने के लिए गोरखपुर यूनिवर्सिटी अगली परीक्षाओं से ‘अमेरिकी लिफाफे’ को आजमाएगी, जो एक बार खुलने के बाद दोबारा किसी भी कीमत पर सील नहीं किया जा सकेगा। प्रयोग के तौर पर हाल में ही संपन्न हुई प्रवेश परीक्षा में इस लिफाफे का इस्तेमाल कर यूनिवर्सिटी प्रशासन ने इस पर मुहर लगा दी है।
‘टाईबैक’ नाम का यह यह विशेष लिफाफा अमेरिकी प्रोडक्ट है और इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली हुई है। दरअसल यह लिफाफा आम लिफाफे जैसा ही दिखता है लेकिन इसकी पैकिंग इसे खास बनाती है। लिफाफा जब तक बंद रहता है तब तक इसकी विशेषता का अहसास नहीं होता। लेकिन जैसे ही इसे खोला जाता है, उस पर लाल रंग में ‘ओपेन’ शब्द उभर आता है। ऐसे में यदि गलती से भी लिफाफे से छेड़छाड़ होती है तो वह उजागर हो जाती है।
लिफाफे के निर्माण में इसमें रखे जाने वाले कागजातों की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा गया है। यह लिफाफा टेंपर प्रूफ, वाटर प्रूफ, एयर प्रूफ और टियर प्रूफ है। यूनिवर्सिटी अब सभी परीक्षाओं में इसी लिफाफे में ही प्रश्नपत्र भेजने की तैयारी में है। यूनिवर्सिटी सूत्रों के मुताबिक इस नए इंतजाम से परीक्षा केंद्रों पर पेपर आउट होने की घटनाओं पर निश्चित तौर पर लगाम लगेगी।
2012 की परीक्षा से शुरू हुई चुनौती
यूं तो प्रश्नपत्र आउट होने को लेकर अफवाहें काफी पहले से उड़ती रही हैं लेकिन गोरखपुर यूनिवर्सिटी के सामने असली चुनौती तब आई, जब 2012 में बीए प्रथम वर्ष का अंग्रेजी, बीए तृतीय वर्ष का समाजशास्त्र और बीकॉम द्वितीय वर्ष का एक-एक पेपर आउट हो गया। इससे यूनिवर्सिटी प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे थे। परीक्षा निरस्त हुई और इसकी सीबीसीआईडी जांच भी कराई गई। यह बात अलग है कि जांच में दोषी मिलने के बाद भी यूनिवर्सिटी कोई निर्णय नहीं ले सकी। हालांकि उसके बाद चार साल तक फिर कोई ठोस प्रकरण सामने नहीं आया लेकिन 2016 की वार्षिक परीक्षा में ज्ञान भारती कॉलेज, रगड़गंज में कॉपियों का पहले से लिखा पाया जाना और रुद्रपुर में एक दिन पहले परीक्षा कराने की शिकायत ने यूनिवर्सिटी प्रशासन के कान खड़े कर दिए।