1962 चीन वार पर आयोजित नेशनल सेमिनार
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गोरखपुर। केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री और पूर्व थल सेनाध्यक्ष जनरल वीके सिंह ने कहा कि पाकिस्तानी कूटनीति का चीन समर्थक रहा है। यही वजह है कि संयुक्त राष्ट्र में मसूद अजहर पर प्रतिबंध लगाने के खिलाफ वह खड़ा हो गया। उसे अभी आतंकवादी घटनाओं का एहसास नहीं है। जिस दिन झेलना पड़ेगा, उसे समझ में आ जाएगा कि आतंकवाद क्या है। उन्होंने कहा कि कौन, क्या करता है इससे हमें कोई फर्क नहीं पड़ता। आतंकवाद के विरुद्ध हमारी लड़ाई जारी रहेगी।
उन्होंने ये बातें बाबा गंभीरनाथ के नाम पर बनी सड़क के लोकार्पण के समय पत्रकारों से बातचीत में कहीं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के लोग पीडीपी-भाजपा गठबंधन को अपवित्र मानते हैं तो उन्हें बताना चाहिए कि जब 2004 में कांग्रेस ने पीडीपी के साथ मिलकर सरकार बनाई थी क्या वह पवित्र गठबंधन था। उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति बहुत प्रभावी है। उसे समझने के लिए बड़ा दिल चाहिए। किसी भी देश की पहचान उसकी संस्कृति से होती है। अंग्रेजी हुकूमत का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि 1857 में अंग्रेजों ने जब लड़ाई जीत ली तो उन्हें इस बात का एहसास हो गया कि यदि सभी भारतीय एकजुट होकर लड़ गए तो उन्हें भारत छोड़कर जाना पड़ेगा। तब उन्होंने फूूट डालो और राज करो की नीति अपनाई। समाज को वर्गों में बाटकर आपस में लड़ाने का कार्य किया। आज देश में भी कुछ लोग इस तरह का कार्य कर रहे हैं। ऐसे लोग समाज को जातियों, धर्म में बांटकर अपना उल्लू सीधा करना चाह रहे हैं।
पूर्व थल सेनाध्यक्ष ने कहा कि कुछ दिन से देश में सहिष्णुता पर बहस चल रही है। सच यह है कि हमारा देश हमेशा सहिष्णु रहा है। उन्होंने इजराइल के जनरल के वक्तव्य का जिक्र करते हुए कहा कि वहां पर चार भारतीय गए थे। सभी ने पहले वहां की पवित्र मस्जिद के सामने सिर झुकाया। फिर वे लोग गिरजाघर गए। उसके बाद वे यहूदियों के पवित्र स्थल पर भी गए। यह देख वहां के एक सैनिक अधिकारी ने उनसे पूछा कि वे लोग किस धर्म को मानने वाले हैं। तब उन लोगों ने जवाब दिया कि हम भारतीय हैं। हमारे अंदर सहिष्णुता है, इस नाते सभी धर्मों का आदर करते हैं।