खुद फंसे, लोगों को भी फंसाया, सुशांत सिटी केे घरों पर चलेगा बुलडोजर
गोरखपुर। शहर के पादरी बाजार स्थित गैर आवासीय जमीन पर बसाई गई कॉलोनी सुशांत सिटी पर गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) का बुलडोजर चलेगा। मनमानी कर डंपिंग ग्राउंड, पार्क की जमीन पर आवासीय कॉलोनी बसाकर कॉलोनाइजर ने अपने साथ सैकड़ों लोगों के लिए भी मुसीबत खड़ी कर दी। कॉलोनी में बने करीब दर्जन भर घरों, कई प्लॉटों की बाउंड्रीवाल, सड़क समेत सभी तरह के निर्माण तोड़ने के लिए जीडीए ने आदेश जारी कर दिया। जल्द ही पुलिस बल की मौजूदगी में निर्माण ध्वस्त कराए जाएंगे। उधर, कॉलोनाइजर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी भी शुरू कर दी गई है। इसके लिए प्राधिकरण के मुख्य अभियंता ने जांच रिपोर्ट के साथ अपनी संस्तुति कर दी है। उपाध्यक्ष ए. दिनेश कुमार की मंजूरी मिलते ही एफआईआर दर्ज करा दी जाएगी।
जानकारी के मुताबिक पादरी बाजार के पास करीब पांच साल पहले विकसित सुशांत सिटी के संबंध में प्राधिकरण से लेकर शासन तक कई शिकायतें हुईं थीं। मुख्य अभियंता संजय सिंह के नेतृत्व में प्राधिकरण की टीम ने जांच की। पाया गया कि करीब छह एकड़ क्षेत्रफल में फैली इस कॉलोनी की जमीन का भू-उपयोग पार्क और डंपिंग ग्राउंड(कूड़ा गिराने वाली जमीन) का है, जहां किसी भी तरह का दूसरा निर्माण नहीं कराया जा सकता। जांच में यह भी पता चला कि बिल्डर ने कॉलोनी के ज्यादातर प्लॉट बेच दिए हैं, जिनमें 10-12 आलीशान मकान भी बन चुके हैं। जीडीए ने कॉलोनाइजर के साथ ही निर्माण कराने वाले लोगों को भी नोटिस भेजकर अपना पक्ष रखने का मौका दिया था। मामले की सुनवाई के बाद अब कॉलोनी के भीतर हुए हर तरह के निर्माण ध्वस्त कराने का आदेश जारी कर दिया गया है। इनमें मकानों के अलावा सड़क, नाली, बाउंड्रीवाल, पोल आदि भी शामिल हैं। इस संबंध में पक्ष पूछने पर सुशांत सिटी के स्थानीय प्रबंधन ने कुछ भी कहने से इंकार किया है।
कॉलोनी में असलहा बाबू राम सिंह का भी घर
गोरखपुर। सुशांत सिटी में ही फर्जी शस्त्र लाइसेंस के सनसनीखेज मामले के आरोपी पूर्व असलहा बाबू राम सिंह का भी घर है। जीडीए के मुताबिक कॉलोनी के सभी घरों के ध्वस्तीकरण का आदेश हो चुका है। जल्द ही उन्हें ध्वस्त करने की कार्रवाई की जाएगी। ऐसा हुआ तो निलंबित होने के बाद जेल में बंद राम सिंह की मुश्किलें और बढ़ जाएंगी।
प्लाटिंग होती रही, घर बनते रहे, ताकता रहा जीडीए
मानचित्र की अनदेखी कर छोटा सा निर्माण कराने वालों को पकड़ लेने वाले जीडीए के अवर अभियंता, पांच साल पहले से सुशांत सिटी में प्लाटिंग कर जमीन बेचने और फिर घर बनाने के काम को नहीं पकड़ सके। डंपिंग ग्राउंड और पार्क की जमीन पर बसी आवास कॉलोनी के मामले में जीडीए अफसरों-कर्मचारियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहा है।
पूरी सुशांत सिटी कॉलोनी जिस जमीन पर बसाई गई है उसका भू-उपयोग डंपिंग ग्राउंड और पार्क की जमीन है। वहां आवासीय या किसी अन्य तरह का निर्माण हो ही नहीं सकता। जांच के बाद कॉलोनी में बने मकानों और अन्य निर्माण को ध्वस्त क रने का आदेश जारी कर दिया गया है। पुलिस बल की मांग कर जल्द ही निर्माण ध्वस्त करा दिया जाएगा। साथ ही कॉलोनी बसाने वाले पर एफआईआर भी दर्ज कराई जाएगी।
- संजय सिंह, मुख्य अभियंता जीडीए
ले-आउट और रेरा में पंजीकरण जांच लें
जब भी प्लाट या फ्लैट लें दो बातों की जांच जरूर कर लें कि संबंधित कॉलोनाइजर्स द्वारा जीडीए से कॉलोनी का ले-आउट स्वीकृत है अथवा नहीं और संबंधित बिल्डर रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट (रेरा) में पंजीकृत है या नहीं। प्राधिकरण से ले-आउट स्वीकृत होने पर जमीन से जुड़े धोखे की आशंका काफी हद तक खत्म तो हो ही जाती है, भविष्य में सड़क, बिजली, पानी जैसे मूलभूत समस्या आने पर प्राधिकरण या निगम उसका निस्तारण भी करेगा। इसी तरह बिल्डर का रेरा में रजिस्ट्रेशन होने से समय से कब्जा मिलने, गुणवत्ता, रेट आदि को लेकर बिल्डर की जवाबदेही तय की जा सकती है। रेरा में शिकायत करने पर संबंधित बिल्डर के खिलाफ जांच होने और शिकायत सही पाए जाने पर कार्रवाई भी होगी। गोरखपुर में 29 बिल्डर रेरा में पंजीकृ त हैं। इनकी जानकारी रेरा की अधिकृत वेबसाइट से प्राप्त की जा सकती है।