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गोरखपुर एम्स को मिलीं पहली देहदानी

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ज्योतिमा दी‌क्षित फाइल फोटो
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गोरखपुर एम्स को मिलीं पहली देहदानी
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गोरखपुर। गोरखपुर एम्स को देहदान के रूप में पहला शरीर कानपुर की ज्योतिमा देवी (70) का प्राप्त हुआ है। उनका पार्थिव शरीर लेकर युग दधीचि देहदान संस्थान के संस्थापक मनोज सेंगर मंगलवार शाम गोरखपुर एम्स पहुंचे। मरने के बाद भी ज्योतिमा दीक्षित का पार्थिव शरीर एम्स गोरखपुर के छात्रों में शिक्षा की ज्योति फैलाएगा। मंगलवार तड़के ढाई बजे हृदयगति रुकने से उनकी मृत्यु हुई। परिजनों की सहमति पर उनका शव गोरखपुर लाया गया।
मनोज सेंगर ने बताया कि कानपुर के श्याम नगर डी ब्लॉक निवासी ज्योतिमा दीक्षित गायत्री परिवार की सक्रिय सदस्य थीं। वर्ष 2007 में उन्होंने देहदान करने की इच्छा जताई थी। पति देव नारायण दीक्षित तो राजी हो गए थे लेकिन बेटा दिवाकर दीक्षित और बेटी दिव्या दीक्षित इसके लिए तैयार नहीं हो रहे थे। बेटी-बेटे का समझाने में उन्हें करीब दो माह का समय लगा। इसके बाद नवंबर 2007 में उन्होंने देहदान का संकल्प लिया। पुत्र दिवाकर दीक्षित बताते हैं कि माता ज्योतिमा दीक्षित बहुत ही धार्मिक प्रवृत्ति की थीं, हमेशा कहती थीं कि यह शरीर जीवित रहते तो सबके काम आ ही रहा है मरने के बाद भी कई लोगों को जीवन दे सके यही सच्चा मोक्ष है। दिवाकर ने बताया कि मंगलवार की भोर में उनकी मां की सांसें थम गईं। इसके बाद उनकी इच्छा के अनुसार युग दधीचि देहदान संस्था को उनका पार्थिव शरीर सौंप दिया गया।
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एम्स एनाटॉमी विभाग के कार्यकारी प्रमुख प्रो. विवेक मिश्रा ने बताया कि संस्था को ज्योतिमा दीक्षित के पार्थिव शरीर के रूप में प्रथम शरीर प्राप्त हुआ है। उनके शरीर का उपयोग एमबीबीएस प्रथम वर्ष के छात्रों को शारीरिक संरचना की शिक्षा देने में किया जाएगा। उन्होंने बताया कि एनाटॉमी विभाग में छात्रों को शरीर का वाह्य, आंतरिक और सूक्ष्मदर्शी अध्ययन कराया जाएगा।
जीवन के अंतिम दिन तक धर्म-कर्म
पुत्र दिवाकर दीक्षित ने बताया कि तबीयत खराब होने के बावजूद स्व. ज्योतिमा देवी ने सोमवार को अहोई अष्टमी का व्रत रखा। शाम को पूजा पाठ कर पति और परिवार के सभी सदस्यों के हित में प्रार्थना की। दिवाकर कहते हैं कि उनकी माता जैसे परोपकारी दुनिया में विरले ही होंगी। उन्होंने बड़े ही धर्म परायणता के साथ महर्षि दधीचि की परंपरा का निर्वहन किया।
एम्स ने वापस किए आभूषण
एम्स में स्व. ज्योतिमा दीक्षित का पार्थिव शरीर लेने की प्रक्रिया एनाटॉमी विभाग के प्रो. विवेक मिश्रा, उप निदेशक अश्वनी माहौर और प्रशासनिक अधिकारी मेजर उपाध्याय ने युग दधीचि देहदान संस्थान के संस्थापक मनोज सेंगर से देहदान संबंधी दस्तावेज लेकर पूर्ण की। दुल्हन की तरह सजाए गए पार्थिव शरीर के गहने और आभूषण उतार कर परिजनों को सौंपने के लिए संस्थान के मनोज सेंगर के हवाले किए गए।
आज दो लोग ज्योतिमा दीक्षित की आंखों से देखेंगे दुनिया
पुत्र दिवाकर दीक्षित ने बताया कि मंगलवार सुबह ही नेत्र चिकित्सक डॉ. रहमानी की टीम ने माता ज्योतिमा दीक्षित की दोनों आंखों से रेटिना निकाली। बताया गया कि मंगलवार शाम को ही शहर के दो दृष्टिहीनों की आंखों में उनकी माता जी की कार्निया प्रत्यारोपित की जाएगी। बुधवार को दोनों लोग दुनिया देख सकेंगे। दस दिन बाद इन दोनों को स्व. ज्योतिमा दीक्षित के परिजनों से मिलाया जाएगा।
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अब तक 213 देहदान करा चुका है युग दधीचि देहदान संस्थान
युग दधीचि देहदान संस्थान के संस्थापक मनोज सेंगर ने बताया कि संस्थान की ओर से अभी तक प्रदेश के विभिन्न मेडिकल कॉलेज, रिम्स में 213 पार्थिव शरीर दान किए जा चुके हैं। कुल 1077 लोगों की आंखों की रौशनी लौटा गई। संस्थान की शुरुआत 2003 में तत्कालीन राज्यपाल विष्णुकांत शास्त्री की प्रेरणा पर की थी।
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