बीआरडी मेडिकल कॉलेज में शार्ट सर्किट से लगी आग से चार घंटे तक बिजली गुल रही। लाइट जाने के आधे घंटे बाद ही जेनरेटर ने भी जवाब दे दिया। आग पर तो फायर बिग्रेड की गाड़ियों ने तत्काल काबू पा लिया जिससे बड़ा हादसा होने से बच गया, लेकिन लाइट न होने से जहां जांच का काम ठप पड़ गया वहीं टॉर्च की रोशनी में ऑपरेशन पूरे किए गए। ट्रॉमा सेंटर तक में लाइट बहाल होने में चार घंटे लग गए। इस दौरान पानी की किल्लत ने लोगों की परेशानी और बढ़ा दी।
शुक्रवार की दोपहर करीब 12 बजे मेडिकल कॉलेज को सप्लाई देने वाली मेन लाइन में फाल्ट हो गया। उससे निकली चिंगारी से नीचे रखे खस में आग लग गई। सब स्टेशन के ऑपरेटर राघवेंद्र सिंह ने इसकी सूचना तत्काल पुलिस को दी जिसके बाद फायर बिग्रेड की गाड़ी ने आग पर काबू पा लिया। लाइट जाने के बाद 250 केवी के नए जेनरेटर से दोपहर दो बजे के करीब विद्युत आपूर्ति बहाल भी कर दी गई, मगर आधे घंटे बाद ही यह जेनरेटर भी जवाब दे गया।
इसके बाद एक्सरे और अन्य पैथोलॉजी जांच बंद हो गई। मरीज लौटाए जाने लगे। जिस समय लाइट गई, उस वक्त गायनी विभाग में कुशीनगर की पटहेरवा निवासी शिलवंति देवी का ऑपरेशन हो रहा था, जिसे डॉक्टरों की टीम ने टॉर्च की रोशनी में पूरा किया। इस भीषण गर्मी में वार्डों में पंखे न चलने से मरीज व तीमारदार परेशान रहे। टंकी में पानी भी खत्म हो गया। सबसे ज्यादा दिक्कत चिल्ड्रेन वार्ड में रही। यहां गर्मी से बेहाल बच्चों को चुप कराने में तीमारदार परेशान रहे। शाम 4.50 बजे के करीब लाइट आ सकी।
मोटर को जेनरेटर से कनेक्शन देने पर विचार
अस्पताल प्रशासन एनआईवी के पास लगे जेनरेटर से मोटर को सप्लाई देने पर विचार कर रहा है। तीन दिनों से पानी की दिक्कत और इसी बीच लाइट कटने से बढ़ी मुसीबत को लेकर अफसर मंथन कर रहे हैं ताकि आकस्मिक सेवा बाधित न हो और पानी टंकी तक पहुंचाया जा सके।