फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

लोकसभा चुनावः जाति की लहरों के उफान से कबीर की धरती भी हैरान

Sat, 11 May 2019 03:03 AM IST
Vikas Kumar उदयभान त्रिपाठी, अमर उजाला, संतकबीरनगर
विज्ञापन
पोलिंग बूथ के बाहर मतदाताओं की कतार - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

जात-पांत से दूर रहने की सीख देने वाले संत कबीर की निर्वाणस्थली संतकबीरनगर लोकसभा सीट पर इस बार जातीय समीकरण को साधना ही जीत का सबसे बड़ा मंत्र है। कबीर की धरती हैरान है। राष्ट्रीय और विकास के मुद्दे जाति की लहरों की उफान में डूब-उतरा रहे हैं। भाजपा उम्मीदवार प्रवीण निषाद को मोदी मैजिक पर यकीन तो है, लेकिन जीत के लिए स्वजातीय और सवर्ण मत के सहारे हैं। गठबंधन उम्मीदवार बसपा के भीष्मशंकर उर्फ कुशल तिवारी भी जीत के लिए अपनी जाति के लोगों के साथ-साथ दलित-यादव-मुस्लिम गठजोड़ पर निर्भर हैं। कई चुनाव बाद इस बार मुकाबले में नजर आ रही कांग्रेस के भालचंद यादव भी जीत के लिए जातीय समीकरण साधने में जुटे हैं।

विज्ञापन


इस संसदीय क्षेत्र के तीन विधानसभा क्षेत्र मेंहदावल, खलीलाबाद व धनघटा संतकबीरनगर जिले में हैं, तो खजनी गोरखपुर में और आलापुर अंबेडकरनगर जिले में। भाजपा ने अंतिम वक्त पर यहां के सांसद और जूताकांड से चर्चा में आए शरद त्रिपाठी का टिकट काटकर गोरखपुर के उपचुनाव में सपा से सांसद बने निषाद पार्टी के नेता इंजीनियर प्रवीण निषाद को उम्मीदवार बनाया है। मेंहदावल के बखिरा चौराहे पर चाय की दुकान पर रामउग्रह कहते हैं कि चुनाव मोदीजी के नाम पर लड़ा जा रहा है। 

प्रत्याशी कौन है, यह ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं। खलीलाबाद के कांटे चौराहे पर युवा संजीवन पढ़े लिखे उम्मीदवार के तौर पर इंजीनियर प्रवीण को पसंद करते हैं लेकिन बाहरी होने का सवाल भी उठाते हैं। दो बार सांसद रह चुके कुशल तिवारी की दावेदारी भी मजबूत है। चौथी बार यहां से लड़ रहे कुशल परंपरागत वोटरों के साथ मुस्लिम व यादव मतों के भरोसे हैं। धनघटा क्षेत्र के रामचंदर मिश्रा कहते हैं कि अकेले ब्राह्मण उम्मीदवार होने से कुशल फायदे में हैं। 
विज्ञापन


विश्वनाथपुर के रामबड़ाई कहते हैं कि ब्राह्मणों के वोट बंटे तो भाजपा को फायदा और बसपा को नुकसान होगा। हैंसर के राजेश और पौली के इम्तियाज भी मानते हैं कि इस बार ब्राह्मण वोटों में हिस्सेदारी तीनों प्रमुख उम्मीदवारों के लिए बड़ी चुनौती है। कांग्रेस उम्मीदवार भालचंद यादव इससे पहले सपा में थे और यहां से दो बार सांसद रह चुके हैं। चकदही गांव के राजन बताते हैं कि भालचंद के आने से मृतप्राय कांग्रेस यहां मुख्य मुकाबले में नजर आ रही है। स्थानीय बनाम बाहरी के मुद्दे पर लड़ाई को रोचक बना रही है। 

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें