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अंबेडकरनगरः कांटे की टक्कर में पिछड़ों के हाथ जीत-हार का दारोमदार

Sat, 11 May 2019 02:47 AM IST
Vikas Kumar महेंद्र तिवारी, अमर उजाला,अंबेडकरनगर
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मतदान केंद्र के बाहर मतदाताओं की कतार - फोटो : अमर उजाला
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डॉ. राम मनोहर लोहिया की जन्मस्थली अंबेडकरनगर संसदीय सीट पर कांटे की लड़ाई के बीच पार्टियों के परंपरागत वोटों में बिखराव है। बसपा ने ब्राह्मण तो भाजपा ने कुर्मी प्रत्याशी उतारे हैं, लेकिन दोनों को अपने वोटरों को पाले में करने के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ रहा है। मुस्लिम गठबंधन के साथ नजर आ रहे हैं, लेकिन यादव बंट रहा है। एससी वोटर शौचालय, आवास, किसान सम्मान निधि के 2000-2000 रुपये और मुफ्त बिजली कनेक्शन पाने की बात कर रहे हैं। ऐसे में चुनाव का गणित निषाद, माझी, मल्लाह, कुम्हार, राजभर, कोरी, नाई, धोबी वोटरों पर टिक गया है। माना जा रहा है कि यह वर्ग जिसे जीतते देखेगा, उसी के साथ हो लेगा। भाजपा ने यहां से यूपी के सहकारिता मंत्री मुकुट बिहारी को मैदान में उतारा है तो बसपा ने पूर्व सांसद रितेश पांडे को उतारा है।

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टांडा विधानसभा क्षेत्र के इनामीपुर चौराहे पर गुलवीश वर्मा कहते हैं कि जातीय खांचे में उलझे मतदाता भाजपा से बाहरी प्रत्याशी उतारे जाने पर सवाल करते हैं तो कांग्रेस प्रत्याशी उम्मेद सिंह का पर्चा खारिज होने से नाखुश भी हैं। अशरफपुर किछौछा में युवा साहुल चौधरी कहते हैं कि बसपा 20 नजर आ रही है। भाजपा प्रत्याशी अभी दिखाई तक नहीं दिए हैं। उन्हीं के बगल में बैठे जगदीश प्रसाद विश्वकर्मा उनकी बात काटते हुए कहते हैं कि अभी किसी को 19-20 नहीं कह सकते। यहां तमाम लोग सरकार से मिले फायदे और राष्ट्रवाद की बात भी कर रहे हैं। मोदी की सभा के बाद से इस पर चर्चा तेज हुई है।

कटेहरी औसानपुर में मिले नाई ऋषिकेश शर्मा बताते हैं कि गठबंधन और भाजपा में टक्कर तेज है। लेकिन हमारी दुकान पर दिनभर सर्व जाति के लोग आते हैं। इस हिसाब से भाजपा भारी है। यहीं बैठे राम मूरत कनौजिया ने कहा कि यादव गठबंधन के साथ ज्यादा हैं, लेकिन भाजपा का हर छोटी-बड़ी जाति से कुछ न कुछ वोट मिल रहा है। गोसाईगंज के बैहारी में मिले यदुनंदन राम बताते हैं कि भाजपा लोकसभा जीती तो बसपा मोदी लहर में विधानसभा की पांच में से तीन सीट झटक लाई। भाजपा दो ही जीत पाई। ऐसे में रितेश या मुकुट बिहारी में से किसी को कमजोर नहीं कह सकते। इल्फातगंज कटेहरी में शफाउद्दीन ने कहा कि कांग्रेस का पर्चा खारिज करने से लड़ाई कांटे की हो गई है।

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