जो बजट छात्र-छात्राओं को रोजगार मुहैया कराने के लिए केंद्र सरकार ने दिया था, उसे मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी) परिसर में खुले नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इलेक्ट्रानिक्स एंड इनफारमेशन टेक्नोलॉजी (नॉयलेट) सेंटर ने सेमिनार पर बहा दिया। अब पैसा खर्च करने का हिसाब-किताब नहीं मिल रहा है। यह खुलासा सेवा योजन दफ्तर से मांगी गई रोजगार और कॅरियर काउंसिलिग की जानकारी से हुआ है। जानकारों के अनुसार यह आर्थिक अपराध की श्रेणी में आता है।
नॉयलेट को रोजगार मेला और कॅरियर काउंसिलिंग के लिए 40 लाख रुपये मिले थे। शैक्षिक सत्र 2016-17 में भी 24 लाख रुपये का भुगतान किया गया। शैक्षिक सत्र 2017-18 तक 16 लाख रुपये और दिए जाने थे लेकिन सरकारी धनराशि के मनमाने इस्तेमाल ने सारा खेल बिगाड़ दिया। अब बकाया धनराशि के भुगतान पर संशय है। दरअसल, सेंटर ने सारा पैसा सेमिनार पर बहा दिया है। इसका सीधा फायदा छात्र-छात्राओं को नहीं मिलता है।
सेमिनार में गेस्ट फैकल्टी और एक्सपर्ट बुलाए जाते हैं। सब मिलकर नाश्ता, खाना लेते हैं, फिर सर्टिफिकेट लेकर चले जाते हैं। इसका रोजगार मेला या फिर कॅरियर काउंसिलिंग से कोई लेना-देना नहीं रहता है। एमएमएमयूटी के सूत्रों ने बताया कि नॉयलेट के इस कारनामे पर सेवा योजन दफ्तर के अफसर खफा हैं। इस प्रोजेक्ट की मानीटरिंग सेवा योजन दफ्तर के पास है। सेवा योजन दफ्तर से ही रोजगार और कॅरियर काउंसिलिंग की जानकारी मांगी गई, तभी गोलमाल का खुलासा हो सका। नॉयलेट की तरफ से एक भी रोजगार मेला या फिर छात्र-छात्राओं का कॅरियर काउंसिलिंग का आयोजन नहीं किया गया।
जुलाई से रोजगार मेला का आयोजन किया जाएगा, फिर पूरी जानकारी सेवा योजन दफ्तर को भेजी जाएगी। इसकी मदद से आठ सेमिनार कराए गए हैं। कॅरियर काउंसिलिंग भी हुई है। इसे प्रोजेक्ट का हिस्सा माना जा सकता है।
एकेडी, कार्यकारी निदेशक, नॉयलेट सेंटर, एमएमएमयूटी