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उच्च न्यायालय से हुई जमानत को भी खारिज कर सकते हैं निचली कोर्ट के न्यायाधीश

Mon, 09 Dec 2019 10:49 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
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एनेक्सी भवन में विशेष कार्यशाला में शामिल हाईकोर्ट के जस्टिस वेद प्रकाश वैश और जस्टिस सलिल कुमार राय - फोटो : अमर उजाला
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यदि किसी आपराधिक मामले में किसी व्यक्ति को सर्वोच्च न्यायालय या उच्च न्यायालय से जमानत मिली है तो निचली अदालतों के न्यायाधीश भी आवश्यक आधार होने पर उसकी जमानत खारिज कर सकते हैं। यदि आरोपी व्यक्ति गवाहों को परेशान करता है, जांच में व्यवधान पैदा करता है तो निचली अदालत जमानत खारिज कर सकती है।
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गोरखपुर मंडल के जिला न्यायालयों के न्यायिक अधिकारियों के लिए आयोजित हुई कार्यशाला में इस तरह की कई न्यायिक बारीकियों पर विस्तार से चर्चा हुई। कार्यशाला की अध्यक्षता कर रहे इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ के न्यायाधीश जस्टिस वेद प्रकाश वैश और इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस सलिल कुमार राय ने विभिन्न न्यायिक पहलुओं पर न्यायिक अधिकारियों का मार्गदर्शन किया।

न्यायिक प्रक्रिया पर सर्किट हाउस के एनेक्सी भवन में विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसका उद्घाटन हाईकोर्ट के जस्टिस वेद प्रकाश वैश और जस्टिस सलिल कुमार राय ने किया। कार्यशाला के दौरान जस्टिस वेद प्रकाश वैश ने न्यायिक प्रकरण में जस्ट (न्याय सम्मत), फेयर (उचित) और रीजनेबल (तर्कपूर्ण) के मायने को विस्तार से समझाया।
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अपराध की तीव्रता के अनुसार ही दंड

उदाहरण देकर बताया कि यदि कोई व्यक्ति दो हजार रुपये की चोरी में पकड़ा गया तो उसकी जमानत में दस हजार रुपये के बांड भरवाना जस्ट, फेयर और रीजनेबल नहीं है। अपराध की तीव्रता के अनुसार ही दंड किया जाना चाहिए। कार्यशाला के रूप में रिफ्रेशर और ओरिएंटेशन कोर्सेज पर आयोजित ज्यूडिशियल ट्रेनिंग के दौरान आपराधिक दंड प्रक्रिया संहिता के तहत जमानत के प्रावधान, आपराधिक मामलों में अवयस्क की सुपुर्दगी, सिविल न्यायालय की अंतरनिहित शक्तियों पर चर्चा की गई।

गोरखपुर, कुशीनगर, देवरिया और महराजगंज जिलों के न्यायालयों के जिला एवं सत्र न्यायाधीश, सीजेएम, एसीजेएम, विशेष न्यायाधीश आदि न्यायिक अधिकारियों ने कानून की बारीकियां समझीं।

कार्यशाला का संचालन नोडल अधिकारी व परिवार न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश देवेंद्र सिंह ने किया। गोरखपुर के जिला एवं सत्र न्यायाधीश गोविंद वल्लभ (शर्मा), जिला एवं सत्र न्यायाधीश देवरिया रामानंद , जिला एवं सत्र न्यायाधीश कुशीनगर राजेंद्र कुमार तृतीय, जिला एवं सत्र न्यायाधीश महराजगंज संजय कुमार डे, सुशील कुमार द्वितीय पीओ कॉमर्शियल कोर्ट गोरखपुर और वीरेंद्र कुमार सिंह पीओ एमएसीटी गोरखपुर सहित चारों जिलों के न्यायिक अधिकारी मौजूद रहे।
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