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भाषा और संस्कार के ‘बीज’ से पनपेगी ‘नर्सरी’

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भाषा और संस्कार के ‘बीज’ से पनपेगी ‘नर्सरी’
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विवेक सिंह
गोरखपुर। नई शिक्षा नीति के माध्यम से स्कूली शिक्षा की आधारभूत संरचना में बड़ा बदलाव करने की तैयारी है। इसके तहत नर्सरी से कक्षा-12 तक की पढ़ाई को चार हिस्सों में बांटा गया है। पहले हिस्से में नर्सरी से कक्षा दो की शिक्षा को रखा गया है। इसमें बच्चों को केवल भाषा और संस्कारों की पढ़ाई कराई जाएगी। न्यू एजुकेशन पॉलिसी का ये मसौदा जिले के सीबीएसई, आईसीएसई और यूपी बोर्ड से संचालित स्कूल प्रबंधनों को भेज दिया गया है।
कक्षा तीन से पांच तक ज्यादा ध्यान एक्टिविटी बेस्ड पढ़ाई पर दिया जाएगा। बच्चों को खेल-खेल में रोचक तरीके से पढ़ाया जाएगा। साथ ही भाषा भी कोर्स में शामिल होगा। विषय की पढ़ाई कक्षा छह से आठ तक कराई जाएगी। बच्चों पर अचानक इसका दबाव न हो, इसलिए इनकी संख्या भी काफी कम होगी। कक्षा 9-12 तक की शिक्षा को पूरी तरह से एनसीईआरटीई पर आधारित बनाया जाएगा। इनमें विषयों की प्रधानता तो होगी ही प्रैक्टिकल भी होंगे।
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सभी जगह कक्षा 3,5,8 के पेपर एक जैसे होंगे
नई व्यवस्था के अंतर्गत कक्षा तीन, पांच और आठ के पेपर भी बोर्ड परीक्षाओं की ही तरह एक जैसे होंगे। यानी दसवीं में पहली बार बोर्ड परीक्षा से पहले तीन बार वैसी ही पढ़ाई के तौर तरीकों से विद्यार्थियों को गुजरना होगा। इनकी परीक्षाएं भी एक साथ होंगी।
एनसीईआरटीई की किताबें ही होंगी लागू
कक्षा 9-12 तक आईसीएसई, सीबीएसई और यूपी बोर्ड से संचालित विद्यालयों में अनिवार्य रूप से एनसीईआरटीई की किताबें ही लागू होंगी। 2022-23 तक इसे लागू किया जाएगा। ऐसे में विद्यार्थी देश में कहीं भी जाएं, उनका सिलेबस एक जैसा होगा।
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कोट
न्यू एजुकेशन पॉलिसी के मसौदा का अध्ययन किया जा रहा है। निश्चित रूप से शिक्षा के स्वरूप में बदलाव होगा। चार हिस्सों में सिलेबस को बांटा गया है। नर्सरी में भाषा के साथ संस्कार की शिक्षा दी जाएगी। - अजय शाही, अध्यक्ष गोरखपुर पब्लिक स्कूल एसोसिएशन
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