शिक्षक मानक पूरा न होने पर अनुमोदित कॉलेजों को बीएड में प्रवेश लेने से रोकने के फैसले पर गोरखपुर यूनिवर्सिटी बैकफुट पर आ गई है। शासन से दिग्विजय नाथ पीजी कॉलेज को मिली राहत के बाद यूनिवर्सिटी ने उसे 50 सीटों की संस्तुति भी दे दी और इसकी सूचना लखनऊ यूनिवर्सिटी को भी भेज दी।
बता दें कि मानक का हवाला देकर यूनिवर्सिटी ने पहले सभी अनुमोदित कॉलेजों को काउंसिलिंग में शामिल करने से मना कर दिया था। लेकिन शुक्रवार शाम को शासन से मिले दिशा-निर्देश के बाद दिग्विजयनाथ पीजी कॉलेज को काउंसिलिंग में अब शामिल कर लिया गया है। शासन से मिले पत्र में साफ किया गया था कि कालेज एनसीटीई रेग्यूलेशन 2014 के अनुसार सभी अर्हताएं पूरी करता है, ऐसे में छह जून से प्रस्तावित बीएड काउंसिलिंग में हिस्सा लेने के लिए कॉलेज को अनुमति दी जाए।
निर्देश के अनुपालन में यूनिवर्सिटी ने 50 सीट के लिए काउंसिलिंग की अनुमति शनिवार की देर शाम दे दी। यूनिवर्सिटी ने इसकी लिखित सूचना राजभवन, सांसद महंत आदित्यनाथ, प्रमुख सचिव को भी दे दी।
बीआरडी और बुद्धा के लिए अच्छे संकेत
डीवीएन कॉलेज को लेकर जारी निर्देश में प्रमुख सचिव ने सभी अनुदानित कॉलेजों को बीएड काउंसिलिंग के योग्य माना था। ऐसे में शनिवार को यूनिवर्सिटी प्रशासन ने अन्य चार अनुदानित कॉलेजों की अर्हता पर भी विचार किया। हालांकि किसी अंतिम निर्णय तक नहीं पहुंचा जा सका। लेकिन बीआरडी कॉलेज देवरिया और बुद्धा पीजी कॉलेज कुशीनगर के लिए यूनिवर्सिटी का रुख सकारात्मक रहा। इस पर सोमवार को फिर मंथन होगा। उधर स्वामी विवेकानंद पीजी कॉलेज मठलार और मदन मोहन मालवीय पीजी कॉलेज भाटपार रानी की अर्हता को शिक्षकों की कमी के चलते सिरे से खारिज कर दिया गया।
सीआरडी और नेशनल को भी 50 सीटें
यूनिवर्सिटी प्रशासन ने सीआरडी पीजी कॉलेज गोरखपुर और नेशनल पीजी कॉलेज बड़हलगंज को भी 50-50 सीटें देने का निर्णय लिया है। इसके लिए दोनों कॉलेजों ने यूनिवर्सिटी प्रशासन से शिक्षकों की संख्या के अनुरूप सीट निर्धारण का अनुरोध किया था।
कॉलेजों के लिए गुआक्टा ने खोला मोर्चा
बीएड कोर्स संचालन से वंचित किए गए वित्तपोषित कालेजों के लिए गुआक्टा ने लड़ाई छेड़ दी है। गोरखपुर यूनिवर्सिटी से संबद्ध महाविद्यालय शिक्षक संघ (गुआक्टा) पदाधिकारियों का कहना है कि जब शासन ने सभी वित्तपोषित कालेजों को बीएड काउंसिलिंग में शामिल करने का आदेश दिया है तो विश्वविद्यालय कुलपति देरी क्यों कर रहे हैं। संगठन की ओर से प्रधानमंत्री, कुलाधिपति, मुख्यमंत्री को पत्र भेजा गया है।
संगठन के अध्यक्ष डॅा. राजेश चंद्र मिश्र और महामंत्री डॉ. एसएन शर्मा ने कहा प्रमुख सचिव ने बीते 3 जून को अपने पत्र में साफ तौर पर कहा है कि सभी वित्तपोषित कालेजों को बीएड काउंसिलिंग में शामिल किया जाए लेकिन कुलपति की मंशा इसे लेकर साफ नहीं दिख रही। यदि इसे लेकर यूनिवर्सिटी ने जल्द निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन किया जाएगा।