हूटर बजाती गाड़ियों का काफिला, आगे-पीछे सुरक्षाकर्मी और नारे लगाते कार्यकर्ता सत्ताधारी दल के किसी भी मंत्री के साथ देखे जा सकते हैं, लेकिन उन्हीं की जमात का एक मंत्री ऐसा भी है जो सारे ऐश-ओ-आराम छोड़कर गांव-गांव अकेले घूमकर खेल प्रतिभाओं की तलाश कर रहा है। प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री का दर्जा प्राप्त खेल सलाहकार डॉ. अनुराग भदौरिया का आलम यह है कि वह जिस गांव में जाते हैं, रात होने पर वहीं खुले आसमान के नीचे गांव वालों के साथ सो जाते है।
इटावा जनपद के पुरा निधान सिंह जैसे छोटे गांव में जन्म लेने वाले डॉ. अनुराग भदौरिया को बचपन से ही क्रिकेट खेलने का शौक था। कपड़े को लपेटकर गेंद बनाकर वह गांव में खेला करते थे, लेकिन एमबीए व पीएचडी करने के बाद आम युवाओं की तरह डॉ. अनुराग भी मल्टी नेशनल कंपनी में भविष्य तलाशने लगे। एक बड़ी कंपनी में मोटी तनख्वाह पर नौकरी भी मिल गई, लेकिन कुछ सालों के बाद उन्होंने नौकरी को छोड़ दिया। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह गांव के युवाओं के लिए कुछ करना था।
अनुराग ने संकल्प लिया कि गांव में रहने वाले युवाओं की क्रिकेट प्रतिभा को निखारने के लिए वह इंडियन ग्रामीण क्रिकेट लीग कराएंगे। इसके लिए वह निकल पड़े, गांव गांव युवाओं की प्रतिभा परखने। 2008 में पहली प्रतियोगिता उन्होंने मोहनलालगंज जनपद के सीमा गांव में आयोजित की। धीरे-धीरे गांव-गांव प्रतियोगिता की चर्चा होने लगी। इसी बीच 2012 में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सैफई महोत्सव में आईजीसीएल कराने के लिए उन्हें आमंत्रित किया। आईजीसीएल के आयोजन को देखकर मुख्यमंत्री इतने प्रसन्न हुए कि उन्होंने डॉ. अनुराग को प्रदेश सरकार में खेल सलाहकार बना दिया।
इसके बाद डॉ. अनुराग ‘बल्ला घुमाओ-किस्मत बनाओ’ का नारा लेकर इंडियन ग्रामीण प्रीमियर लीग (आईजीसीएल) कराने के लिए अकेले ही निकल पड़े। अब तक बरेली, झांसी, लखनऊ, वाराणसी, इटावा में वह इस प्रतियोगिता का आयोजन करा चुके है। इन आयोजन में अनुराग ने अपनी जमा पूंजी भी खर्च कर दी, जिस वजह से परिवार के लोगों का तिरस्कार भी सहना पड़ा, लेकिन आज उनके इस अभियान में गांव-गांव के युवा बड़े ही उत्साह से जुड़ रहे हैं।