संगीता बताती हैं कि उन्हें स्टेट बैंक आफ इंडिया की आरसेटी योजना के तहत एलईडी बल्ब और झालर बनाने की ट्रेनिंग दिलाई गई थी। इसके बाद समूह को बैंक ने लोन और कच्चा माल दिलाया। वर्तमान में गीडा से कच्चा माल लाकर बल्ब और लड़ियां तैयार की जा रही हैं। उनके साथ सुनीता, अनीता, निशा और रेनू उत्पादन में सहयोग कर रही हैं। ये महिलाएं प्रति माह पांच हजार रुपये तक कमा रही हैं।