दीक्षांत समारोह सप्ताह में सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करतीं छात्राएं।
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गोरखपुर यूनिवर्सिटी के 35वें दीक्षांत समारोह की कड़ी में बुधवार को सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों की भव्य प्रस्तुतियों ने माहौल को खुशनुमा बना दिया। लोकगीत ‘कुइयां के ठंडा पानी’ और ‘उहे मोरा गांव ने’ की सुरीली प्रस्तुतियों ने ऑडिटोरियम में भोजपुरी लोकगीताें की मिठास घोल दी। इसके बाद हास-परिहास का दौर चला। इसमें विवेक शुक्ला की मिमिक्री तथा नाट्य समूह की सामयिक राजनैतिक परिस्थितियों पर चुटीली व्यंग्यात्मक प्रस्तुति से दर्शकों के मध्य हंसी की लहर दौड़ गई।
इसके बाद बॉलीवुड गीतों के सुरीले मिश्रण के रूप में ट्रिब्यूट सांग पेश किए गए। ललित कला विभाग की छात्राओं ने जब सूफी कव्वाली ‘छाप तिलक सब छीनी’ की प्रस्तुति दी तो सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूँज उठा। इस अवसर पर पं भोलानाथ मिश्रा के नेतृत्व में वाराणसी से आए कथक समूह ने शिव-शक्ति की कथा पर भावपूर्ण कथक पेश किया। कथक नर्तक वसुंधरा शर्मा, अमृत मिश्रा, रश्मि डे, शुभ्रा मुंशी एवं सागर शर्मा ने तबले की थाप पर भावमुद्राओं का मार्मिक चित्रण किया जिसे दर्शकों ने भरपूर तालियों से नवाज़ा।
कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती वंदना के साथ हुई। तत्पश्चात मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. पृथ्वीश नाग ने दीप प्रज्ज्वलित किया। अतिथियों का स्वागत कार्यक्रम संयोजक एवं विभागाध्यक्ष ललित कला एवं संगीत विभाग डॉ. उषा सिंह ने किया। धन्यवाद ज्ञापन प्रो. सुधा यादव ने किया। संचालक शुभेंद्र सत्यदेव रहे।