जेल से भाग रहे कैदियों को रोकने के लिए बंदीरक्षकों ने फायरिंग की।
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मंडलीय कारागार में सख्ती बरतने वाले अफसरों और कर्मचारियों पर हमला कोई नया मामला नहीं है। पहले भी कई अफसरों और कर्मचारियों पर बंदी हमला कर और करा चुके हैं। दस साल पहले जेलर के आवास पर बम से हमला हुआ था। डिप्टी जेलर के परिवार को बंधक बनाकर बदमाश लूटपाट कर चुके हैं। डेढ़ साल पहले वॉच टॉवर पर चढ़कर बदमाशों ने बंदीरक्षक और होमगार्ड को लूटकर सनसनी फैला दी थी। लगातार बढ़ रही घटनाओं के बाद जेल की सुरक्षा तो बढा दी गई लेकिन व्यवस्था में कोई सुधार फिर भी नहीं हुआ।
दस साल पहले गोरखपुर में तैनात जेलर एके राय ने जेल में तैनात कई बंदीरक्षकों को पकड़कर फर्जी भर्ती का पर्दाफाश किया था। फर्जी तरीके से तैनाती पाने के बाद बंदीरक्षक जेल के बंदियों को सुविधा मुहैया कराते थे। इसके बाद प्रदेश में हड़कंप मच गया था और जेलों में सख्ती बढ़ा दी गई। इस घटना के कुछ दिन बाद बदमाशों ने जेलर पर बम से हमला कर दिया था। पत्नी के साथ घर के पीछे भागकर किसी तरह उन्होंने जान बचाई थी। इस घटना के कुछ दिन बाद गोरखपुर जेल में बंद बदमाशों ने सख्ती बरतने वाले डिप्टी जेलर समर बहादुर, बंदी रक्षक संतोष तिवारी व कमलेश की हत्या की सुपारी शूटरों को दे दी थी, लेकिन एसटीएफ ने सर्विलांस की मदद से शूटरों को दबोच कर मामले का पर्दाफाश किया।
जेलर नौमी लाल को शातिर बदमाश विकास सिंह ने जेल में सख्ती करने पर बम से उड़ाने की धमकी दी थी। 18 दिसंबर 2014 को डिप्टी जेलर राजेश मौर्य को परिवार के साथ बंधक बनाकर बदमाश ने लूटपाट की थी। इस घटना के बाद बदमाशों ने 6 मार्च 2016 को वॉच टॉवर पर चढ़कर होमगार्ड और बंदीरक्षक के सामान और मोबाइल लूट लिए थे। एक साल बाद क्राइम ब्रांच की टीम ने डिप्टी जेलर के आवास और वॉच टॉवर पर बंदीरक्षक, होमगार्ड से हुई लूटपॉट की दोनों घटनाओं का पर्दाफाश किया। पकड़े गए बदमाशों से पूछताछ में पता चला कि उन्होंने जेल में बंद माफिया के इशारे पर वारदात को अंजाम दिया था। घटना के बाद माफिया को दूसरे जेल में स्थानांतरित कर दिया गया था।
नौ नंबर बैरक में बनी थी योजना
जेल अधिकारियों की मानें तो गुरुवार को जेल में हुए बवाल की योजना बैरक नंबर नौ में बनी थी। यहां बंद रामाकांत यादव, योगेंद्र यादव के उकसावे पर ही सभी बंदी एकजुट हो गए थे। साजिश में शामिल ज्यादातर बंदी इसी बैरक के हैं। छापेमारी के दौरान इन बंदियों के पास से भी मोबाइल मिले थे जिनके जब्त होने के बाद उन्होंने बवाल की साजिश रची थी।