गोरखपुर। वक्ताओं ने कहा कि आधुनिक चिकित्सा को मानने वाले बीमारियों का कारण शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को मानते हैं जो आयुर्वेद के जानकारों ने हजारों साल पहले ही बता दिया था। विज्ञान जागरूकता समिति, वशिष्ठ स्मारक न्यास एवं देवता केदार न्यास की ओर से मंगलवार को भारतीय चिकित्सा पद्धति विषय पर बैठक हुई। कविराज आत्माराम की अध्यक्षता में आयुर्वेद चिकित्सा पर मंथन किया गया। इसमें त्रिदोष जनित शोध को रोगों के मूल कारण की आयुर्वेदिक समझ को एक स्वर से मान दिया गया।
बैठक में मौजूद विद्वानों ने कहा कि देश की वर्तमान स्थिति और यहां के निवासियों की प्रतिरोधक क्षमता को देखते हुए गहन शोध की जरूरत है। इसे देखते हुए जीव विज्ञान एवं आयुर्वेद के सिद्धांतों की आपसी समझ बढ़ाने का प्रयास किया जाए। इसके लिए आण्विक एवं आयुर्वेदिक जीव विज्ञान संस्थान की स्थापना करने पर विद्वान एकमत हुए।
प्रो. राजावशिष्ठ त्रिपाठी की अध्यक्षता में समिति घोषित की गई। इसमें केरला के डॉ. सुनील कुमार, चेन्नई के डॉ. नम्वी नम्बूदरी, पुदुचेरी के डॉ. एचके वर्मा, वाराणसी के प्रो. चंद्रभूषण झा, प्रो. रामहर्ष सिंह, नार्वे की गोर्गहिल्ल का नाम शामिल किया गया है। संस्था आयुर्वेद पर विशेष शोध करेगी और देश की प्रमुख बीमारी मधुमेह की रोकथाम के लिए शिक्षा एवं चिकित्सा का प्रबंध करेगी। इस दौरान आरोग्य मंदिर के डॉ. विमल कुमार मोदी, वैद्य आरपी दुबे, डॉ. दिनेश कुमार सिंह, डॉ. अनिल मल्ल, डॉ. मत्युंजय त्रिपाठी, डॉ. विनय, अमित त्रिपाठी आदि उपस्थित थे।