पाकिस्तानी आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से संपर्क में रहने के आरोप में शहर के दो बड़े व्यापारी भाइयों की गिरफ्तारी से हड़कंप मच गया है। व्यापारी भाइयों से पूछताछ के बाद दुकान के छह से ज्यादा कर्मचारियों को हिरासत में लिया गया है। कर्मचारियों ने व्यापारी के कई करीबी लोगों के नाम बताए हैं जिनकी तलाश में छापेमारी की जा रही है। एटीएस को मोबाइल, लैपटॉप से भी कई सुराग हाथ लगे हैं।
शनिवार को बलदेव प्लाजा स्थित मोबाइल की दुकान नईम एंड संस पर भारी पुलिस बल ने छापा मारा था। यहां से नईम के दो बेटे नसीम अहमद और नईम अरशद (बॉबी) को गिरफ्तार किया गया था। पहले व्यापारी इसे आयकर या सेल्स टैक्स का छापा समझ रहे थे, मगर उन्हें जब यह पता चला कि दोनों भाइयों के आतंकी संगठन के लिए काम करने की पुष्टि हुई है तो उनमें हड़कंप मच गया। एटीएस ने दोनों भाइयों से पूरी रात पूछताछ करने के बाद खोराबार के पांडेय टोला निवासी दयानंद यादव को भी गिरफ्तार किया। आरोप है कि दयानंद भी व्यापारी बंधुओं के कहने पर बैंक एकाउंट में रुपये मंगाता था। तीनों से पूछताछ के बाद पुलिस ने मोहद्दीपुर में ठेला लगाने वाले बिहार निवासी एक अन्य व्यक्ति को हिरासत में लिया है। उससे पूछताछ चल रही है।
नेपाल से जुड़े हैं तार
गिरफ्तार लोगों के तार नेपाल से जुड़े होने की पुष्टि हुई है। इसमें नेपाल के भी कुछ नागरिक शामिल रहे हैं, जिनकी तलाश में बॉर्डर पर पुलिस को अलर्ट कर दिया गया है। एटीएस भी इनकी पहचान और तलाश में लगी है।
बैंक एकाउंट की होगी जांच
पकड़े गए लोगों के बैंक अकाउंट की भी जांच होगी। इनके खाते से जिन-जिन लोगों के खाते में रुपये भेजे गए हैं, उनकी जांच कराई जाएगी। खाता खुलने के दौरान पहचानकर्ता के तौर पर हस्ताक्षर करने वालों की भी पड़ताल होगी।
नाम बदलकर रहता था मास्टर माइंड
आतंकी संगठन से जुड़ा मास्टर माइंड कुशीनगर का रहने वाला है। यह अपना नाम बदलकर रहता था। मुशर्रफ अंसारी ने अपना नाम निखिल राय रखा था। यहां तक कि उसके दोस्त और करीबी भी उसे निखिल के नाम से ही जानते थे।
करोड़ों की संपत्ति के मालिक हैं दोनों भाई
गांधी गली के अपार्टमेंट में रहने वाले नसीम और नईम अरशद करोड़ों रुपये के मालिक हैं। तीन साल के अंदर दोनों भाइयों ने शहर के प्रमुख बाजार बलदेव प्लाजा में बड़ा शोरूम खोलने के साथ ही रेती रोड पर भी दुकान ली थी। उनकी एक अन्य दुकान और शहर का पॉश इलाका कहे जाने वाले हरिओम नगर में आलीशान मकान का निर्माण चल रहा है।
आतंकी नेटवर्क को भांप नहीं पाईं खुफिया एजेंसियां
एटीएस की गोरखपुर मंडल में की गई कार्रवाई ने खुफिया एजेंसी और स्थानीय पुलिस की नाकामी भी उजागर कर दी है। लंबे समय से गोरखपुर और आसपास के जिले के लोग आतंकी संगठन के सीधे संपर्क में थे और जिले की खुफिया एजेंसी इससे बेखबर थीं। एटीएस के छापे के बाद खुफिया एजेंसी और पुलिस को भी यह जानकारी हुई कि शहर के प्रमुख बाजार में ही बड़े मोबाइल व्यापारी के तौर पर पहचान बना चुके नसीम और नईम अरशद आतंकी संगठन के लिए फंडिंग कर रहे हैं। यह हाल तब है जब किराएदार से लेकर व्यापारी तक के सत्यापन और गतिविधियों की निगरानी का दावा किया जाता है। ऐसे में यह पुलिस की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल भी है। यदि पुलिस ने वास्तव में वेरिफिकेशन किया होता तो वे पहले ही पकड़ में आ जाते। अब पुलिस भले ही रिमांड पर लेकर पूछताछ कर कार्रवाई का दम भर रही हो, लेकिन असलियत यह भी है कि यदि एटीएम ने यह कार्रवाई न की होती तो अभी इनके धंधे को पकड़ पाना शायद स्थानीय पुलिस या खुफिया एजेंसी के बस की बात नहीं थी।
अरे! ये आतंकियों से जुड़े थे, ताज्जुब है
नसीम और नईम की असलियत सामने आने के बाद सभी हैरान हैं। कल तक जो उनके सुख-दुख के साथी थे, अब उन्होंने दूरी बना ली है। सुबह गांधी गली स्थित उनके आवास पर सन्नाटा पसरा था, जबकि रविवार की बंदी के बावजूद बलदेव प्लाजा के आसपास जुटे व्यापारियों के बीच भी दोनों भाई चर्चा के विषय रहे। ज्यादातर व्यापारी उनके कारनामे पर आश्चर्य जता रहे थे। मोबाइल सेट की सप्लाई करने वाले एक व्यापारी का कहना था कि अरे, ये दोनों भाई आतंकियों से जुड़े हुए थे, इसकी किसी को भनक तक नहीं लग पाई। जब भी मुलाकात होती थी, दोनों भाई धंधे की ही बात करते थे। गांधी गली के पड़ोसियों का भी यही कहना था कि दोनों ज्यादा किसी से बात नहीं करते थे।
रेडियो पार्ट्स की दुकान से शुरू हुआ था सफर
नसीम और नईम अरशद के पिता नईम की रेती रोड स्थित रेडियो पार्ट की एक छोटी दुकान थी। सन 2002 में माया बाजार स्थित आनंद कांप्लेक्स में बड़े भाई नईम ने एक दुकान ली। वहां भी इलेक्ट्रानिक पार्ट्स का काम शुरू हुआ। बाद में चूंकि यह कटरा मोबाइल मार्केट की ओर बढ़ने लगा, ऐसे में नईम ने भी मोबाइल एसेसेरीज का काम शुरू कर दिया। तब तक इनकी स्थिति बेहद सामान्य थी। दोनों आरोपियों से जुड़े करीबियों के मुताबिक 2008-2009 में भाइयों ने मिलकर गोलघर बलदेव प्लाजा में नईम एंड संस नाम से दुकान खोली। शुरूआत में तो यहां भी दोनों सिर्फ मोबाइल एसेसेरीज का ही काम करते थे मगर बाद में वे मोबाइल हैंडसेट के होलसेल कारोबार में लग गए और इस क्षेत्र के बड़े व्यापारी के रूप में पहचान बना ली। करीब तीन साल पहले रेती रोड स्थित सुपर मार्केट में बड़े भाई नईम ने बड़ा शोरूम खोला। वहां उसने एलईडी टीवी व मोबाइल हैंडसेट का होलसेल काम शुरू किया। इसके बाद दोनों भाई अलग काम करने लगे। नईम जहां सुपर मार्केट की दुकान संभालता था, वहीं नईम अरशद बलदेव प्लाजा की दुकान चला रहा था, जबकि आनंद कटरे वाली दुकान स्टॉफ के भरोसे चलती है। कुछ महीने पहले ही दोनों भाइयों तीन करोड़ में बलदेव प्लाजा में एक और दुकान खरीदी थी।