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अंदर नाव हादसा

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नदी में डूबने वाले लोगों की संख्या को लेकर संशय
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अमर उजाला ब्यूरो
अयोध्या। नदी में डूबने वाले लोगों की संख्या को लेकर काफी देर तक संशय बना रहा। घाट के किनारे मौजूद लोगों का कहना था कि जिस समय नाव दुर्घटनाग्रस्त हुई, उस समय में लगभग दर्जन भर लोग मौजूद थे। वहीं, डीआईजी ओंकार सिंह ने नाव पर चार लोगों के सवार होने की जानकारी देते हुए कहा कि तीन लोग को बचाया गया है, एक की तलाश की जा रही है। रेस्क्यू ऑपरेशन समाप्त होने के बाद एसपी सिटी अनिल सिंह सिसौदिया व सीओ अयोध्या राजू साव ने नाव पर दो नाविक व एक फोटोग्राफर समेत कुल सात लोगों के सवार होने की पुष्टि की, बताया कि हादसे में तीन की मौत हुई है। राहत और बचाव कार्य में कोई असुविधा नही हो, इसके लिए अयोध्या से गोंडा की ओर जाने वाले सरयू पुल के मार्ग को बंद कर पुल के ऊपर क्रेन की सहायता से रस्से से पिलर के नीचे फंसी नाव को बाहर निकाला गया। रेस्क्यू ऑपरेशन में पीएसी 30वीं वहिनी, फ्लड कंपनी के छह जवान व जल निगम की टीम के साथ स्थानीय नाविकों ने भी सहयोग दिया।


अनट्रेंड व नाबालिग नाविक चला रहे नाव
अयोध्या। कुछ वर्षों में सरयू नदी पर नौका विहार कराने वालों नावों की संख्या में काफी इजाफा हुआ है। इन नावों को चलाने वाले ज्यादातर नाविक अनट्रेंड है जबकि कुछ नाबालिग भी है। इनके द्वारा नियमों के विपरीत ज्यादा लोगों को नाव पर घुमाने ले जाना, मनमर्जी किराया वसूल करने की शिकायतें आम हो चुकी। स्थानीय पंडों का आरोप है कि सब कुछ पुलिस के संरक्षण पर चल रहा है, इन नावों पर लाइफ लाइन जैकेट का भी कोई इंतजाम नहीं है। पूर्व जिलाधिकारी किंजल सिंह के समय इन नावों पर 35 लाइफ लाइन जैकेट उपलब्ध कराई गई थी लेकिन आज उनका कोई पता नहीं है। इस संदर्भ में एडीएम सिटी विंध्यवासिनी राय ने बताया कि इसका प्रपोजल तैयार है, जल्द ही लाइफ लाइन जैकेट अनिवार्य किया जाएगा। नवागत एसएसपी अखिलेश चौरसिया ने बताया कि नौका विहार के दौरान नाव पर सवार लोगों को लाइफ लाइन जैकेट पहनना अनिवार्य होता है। इसके लिए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। नाबालिग व अनट्रेंड नाविकों पर उन्होंने कहा कि नए सिरे से इनकी जांच की जाएगी और प्रशिक्षित नाविकों को ही नाव चलाने दिया जाएगा।
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गांव में मातम छाया
विक्रमजोत/बस्ती। अयोध्या में हुए हादसे के बाद गांव में मृतक युवकों के परिवार के लोग अयोध्या रवाना हो गए। गांव में मातम का माहौल है। हर कोई एक दूसरे की तरफ सवालिया नजर से देख रहा है, पर किसी की हिम्मत नहीं हो रही थी कि हादसे के बारे में कोई बात करे। अगई भगाड़ गांव के प्रधान पुनीत सिंह के अनुसार सभी लोग रिश्तेदार की बेटी के मुंडन संस्कार में शामिल होने गए थे।
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