शोहदों को जेल नहीं, थाने से बाइज्जत छोड़ा गया
खोराबार (गोरखपुर)। तहरीर ना होने की दलील देकर शोहदों को थाने से बाइज्जत छोड़ दिया। आरोपियों पर केस दर्ज करने की जगह शुरू से ही पुलिस उनको बचाने में उतर आई थी। पहले किशोरी को बेइज्जती होने का डर दिखाकर लौटा दिया गया फिर शांतिभंग में शोहदों का चालान हुआ। अफसर सख्त हुए तो दोबारा दोनों आरोपी पकड़कर थाने लाए। तीन दिन थाने में बैठाने के बाद सत्ताधारी नेता के साथ एक आरोपी के चाचा, जो गांव के प्रधान थे, पहुंचे। फिर पुलिस ने छेड़खानी जैसे आरोप में शामिल युवकों को थाने से ऐसे छोड़ा जैसे कुछ हुआ ही ना हो। जबकि पुलिस चाहती तो खुद वादी बनकर शोहदों को किए की सजा दिला सकती थी।
एक सप्ताह पहले कुसम्ही जंगल में एक छात्रा के साथ छेड़खानी करने के मामले में पुलिस ने दो युवकों को उठाया था। शुरुआत में पुलिस ने उन्हें शांतिभंग में चालान कर दिया था। बाद में जब अधिकारियों को पता चला तो खोराबार पुलिस ने आरोपियों को एक बार फिर उठा लिया और उन्हें थाने में बैठाकर अधिकारियों को समझाने की कोशिश शुरू की। खोराबार थाने की पुलिस अपने इस मंसूबे में चार दिन में कामयाब भी हो गई। नतीजा यह हुआ कि शनिवार को दोनों शोहदों को थाने से बाइज्जत छोड़ दिया गया। उधर, पकड़े गए युवकों में एक प्रधान का भतीजा है। उन्हें छुड़ाने के लिए कई लोग लगे हुए थे। कई दिन की माथापच्ची के बाद अफसराें ने आंखें बंद कर लीं और फिर थानेदार दोनों को छोड़ दिया।
छात्रा या फिर उसके परिवार के किसी भी शख्स ने युवकों के खिलाफ तहरीर नहीं दी है। छात्रा भी कुछ बताने को तैयार नहीं थी। कुसम्ही जंगल में दोबारा ऐसी घटना ना होने पाए इसे देखते हुए एहतियातन पुलिस पिकेट लगा दी गई है।
बोत्रे रोहन प्रमोद, सीओ, कैंट