गोरखपुर यूनिवर्सिटी के 34वें दीक्षांत समारोह सप्ताह का सोमवार को आगाज हो गया। इसकी शुरुआत ‘स्टेम सेल्स : बायोमेडिसिन का भविष्य’ विषय पर कुलपति प्रो. अशोक कुमार के व्याख्यान से हुई। इसमें उन्होंने कहा कि स्टेम सेल से कई असाध्य रोगों को इलाज संभव है। प्राणि विज्ञान की ओर से आयोजित इस व्याख्यान में उन्होंने कहा कि स्टेम सेल लगातार विभाजन कर सकती हैं, इसके साथ ही अन्य सेल व ऊतकों में परिवर्तित भी हो सकती हैं।
इलाज के तरीके पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में रोगी के शरीर से ही स्टेम सेल को प्राप्त किया जाता है और जरूरत के मुताबिक विशिष्ट कोशिकाओं में बदलकर उनमें ट्रांसप्लांट किया जाता है। कुलपति ने बताया कि स्टेम सेल से पार्किंसन, अल्जाइमर, हृदय रोग, मधुमेह, यकृत, स्पाइनल कार्ड, ल्यूकोमिया जैसे रोगों का स्थाई इलाज किया जा सकता है। देश में कई स्टेम सेल के बैंक बनाए गए हैं। व्याख्यान से पहले दीक्षांत अनुश्रवण समिति के संयोजक प्रो. एचएस शुक्ल ने व्याख्यान के विषय के चयन का औचित्य बताया। अंत में विभागाध्यक्ष प्रो. राजेंद्र सिंह ने अतिथियों का आभार ज्ञापन किया। इस अवसर पर यूनिवर्सिटी के शिक्षक और कर्मचारी मौजूद रहे।
तीन पूर्व कुलपतियों की मिली सहमति
यूनिवर्सिटी के इतिहास में पहली बार पूर्व कुलपतियों को दीक्षांत समारोह में आमंत्रित कर सम्मानित किये जाने की तैयारी है। तीन पूर्व कुलपतियों ने समारोह में शामिल होने के लिए सहमति भी दे दी है। इनमें प्रो. बीएम शुक्ल, प्रो. एसएम मलिक और प्रो. राधेमोहन मिश्र शामिल हैं। यह जानकारी कुलपति प्रो. अशोक कुमार ने दी।
डिग्री के लिए बनाए गए आठ काउंटर
विद्यार्थियों को डिग्री लेने में कोई दिक्कत न हो, इसके लिए कोर्सवार अलग-अलग काउंटर बनाए गए हैं। ये काउंटर 17-18 फरवरी को सुबह 11 बजे से शाम चार बजे तक खुले रहेंगे। काउंटर एक से बीए-2015, दो से बीएससी-2015, तीन से बीकॉम-2015, चार से एमकॉम-2015, पांच से एमए-2015, छह से एमएससी-2015, सात से बीबीए, एमबीए -2015 और बीएड-2014, आठ से एलएलबी 2014-15, एलएलएम-2014 और पीएचडी की डिग्री मिलेगी।
शिक्षक बनने की है तमन्ना
एमए में बेहतर नंबर पाने के बाद मैं फिलहाल जवाहर नवोदय विद्यालय में संविदा शिक्षक के तौर पर काम कर रहा हूं। नेट क्वालिफाई करके उच्च शिक्षा में बतौर शिक्षक योगदान देने की तमन्ना है। टॉप करने से हौसला बढ़ा है।
- विनय कुमार गुप्ता, एमए (मंच कला) टॉपर
आईएएस बनने की ख्वाहिश
पढ़ाई में मेरी रुचि देखकर मम्मी-पापा ने शुरू से ही मुझे आईएएस बनने के लिए प्रेरित किया है। इस समय दिल्ली में रहकर अपने इसी उद्देश्य के लिए कोचिंग कर रही हूं। मम्मी-पापा के लिए मुझे आईएएस बनने के लिए हर जतन करना है।
- नेहा कुमारी गुप्ता, बीएससी टॉपर
बनना है बैंक अफसर
पापा बैंक में हैं और भाई ने भी बैंक पीओ की परीक्षा में सफलता पाई है। ऐसे में मेरी भी बैंक अफसर बनने की ख्वाहिश है। फिलहाल एमबीए कर रही हूं। एमबीए पूरा करने के बाद बैंक परीक्षाओं की तैयारी में शिद्दत से जुट जाना है।
- पूजा श्रीवास्तव, बीकॉम टॉपर
भाता है प्रोफेसर का पद
बीए में प्रवेश के बाद से ही मुझे प्रोफेसर का पद चार्मिंग लगता है। संजीदगी से जीवन जीने के लिए मेरी नजर में इससे बढ़िया कोई प्रोफेशन नहीं है। एमए टॉप करने से मुझे इसके लिए हौसला मिला है। ‘नेट’ दिया है, उम्मीद है सफलता मिलेगी।
- सतीश पाठक, एमए (इतिहास) टॉपर