मुख्य सचिव आलोक रंजन की सख्ती का असर सूखा राहत मुआवजे के वितरण में दिखाई पड़ने लगा है। पखवारे भर से अधिक समय के भीतर जहां वितरण की कार्रवाई शुरू नहीं हो सकी थी वहीं इस सख्ती के बाद सप्ताह भर के भीतर 55 हजार किसानों के बीच 17 करोड़ रुपये का मुआवजा बांट दिया गया।
जिला प्रशासन का दावा है कि पखवारे भर से लेकर 20 दिन के भीतर सभी प्रभावित किसानों के खाते में मुआवजे की रकम पहुंच जाएगी। एडीएम (फाइनेंस) डॉ चंद्रभूषण का कहना है कि मुआवजा वितरण की प्रगति रोजाना जांची जा रही है। तीन शिफ्ट में निरंतर 24 घंटे तहसील के कर्मचारी किसानों के खाते में मुआवजे की रकम भेज रहे हैं।
उन्होंने किसानों से भी अपील की कि वे अपने बैंक खातों की जांच कर लें कि वे चालू है या नहीं। इसी तरह गांव के प्रधान से संपर्क कर यह सुनिश्चित कर लें कि क्षेत्र के लेखपाल तक उनके बैंक खाते का पासबुक और खतौनी के कागज पहुंच जाएं।
दरअसल कई किसानों के बैंक खाते बंद मिल रहे हैं। चूंकि कई किसानों को एक साथ आरटीजीएस के जरिए सीधे खाते में रकम भेजी जा रही है, ऐसे में खाता बंद होने या खाते में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की वजह से सभी का मुआवजा फंस जा रहा है। इससे किसानों को तो दिक्कत हो ही रही है, मुआवजा वितरण में लगे कर्मचारियों को भी दोबारा मेहनत करनी पड़ रही है।