कमिश्नर अनिल कुमार ने शनिवार को मेडिकल कॉलेज में इंसेफेलाइटिस वार्ड का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने बी2 कक्ष में तीस बेड पर 80 मरीजों को भर्ती देख सवाल पूछ लिया। उन्होंने इसके दायरे को बढ़ाने के लिए प्रपोजल तैयार करने को कहा, जिस पर प्राचार्य ने पहले ही प्रपोजल भेजे जाने की जानकारी दी। इसके अलावा प्राचार्य ने दवा, ईटीसी और ट्रेनिंग हाल की व्यवस्था करने पर चर्चा की। कमिश्नर ने सभी पर प्रपोजल मांगा है।
प्राचार्य प्रो. राजीव मिश्रा ने कमिश्नर से दवाओं की कमी को लेकर बात की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार से इसके लिए जो धन मिलता है, उससे पूरी खरीद नहीं हो पाती। इसे देखते हुए उन्होंने एनएचएम के तहत दवाएं दिलाने की मांग की है। इसके अलावा प्राचार्य ने इंसेफेलाइटिस को लेकर ट्रेनिंग आदि के लिए हाल के निर्माण की मंजूरी के लिए भी कमिश्नर से बात की।
प्राचार्य ने कहा कि सीएचसी, पीएचसी पर ईटीसी (इंसेफेलाइटिस ट्रेनिंग सेंटर) खोले गए हैं, उसे ठीक से क्रियाशील करना होगा ताकि मरीजों का लोड न बढ़े। कमिश्नर ने इंसेफेलाइटिस वार्ड में भर्ती मरीजों से व्यवस्थाओं के बारे में भी जानकारी ली। उन्होंने प्राचार्य से कहा कि कहीं भी मरीजों को परेशानी न होने पाए। जो भी दिक्कत या कमी हो, उसकी तत्काल मुझे जानकारी दें।
टीका लगने के बाद भी हो गया इंसेफेलाइटिस
निरीक्षण के दौरान तीमारदारों से कमिश्नर ने टीका लगने और पेयजल की भी जानकारी ली। इस दौरान दो मरीज ऐसे सामने आए, जिनके तीमारदारों ने बताया कि समय से टीका लगवाने के बाद भी उनका बच्चा दिमागी बुखार की चपेट में आ गया। कमिश्नर ने इस पर डॉक्टरों से वजह पूछी तो डॉक्टरों ने बताया कि इसके पहले भी ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं। इस पर अभी अध्ययन चल रहा है।