इंसेफेलाइटिस के मामले में अति संवेदनशील माने जाने वाले महराजगंज पहुंचे सीएम योगी आदित्नाथ ने रविवार को राजनीति से इतर सिर्फ इस बीमारी की बात की। हाल के वर्षों में इंसेफेलाइटिस से मासूमों की मौत का जिक्र किया। बचाव के लिए सरकार की ओर से उठाए गए कदमों की जानकारी दी और लोगों से स्वच्छता के जरिए इस बीमारी को हराने का आह्वान किया। कहा कि इंसेफेलाइटिस के खिलाफ चल रही जागरूकता मुहिम जन आंदोलन बन गई है, जिससे तराई क्षेत्र में भी इस बीमारी के तेवर ढीले पड़ चुके हैं।
आईटीएम चेहरी में एक निजी टीवी चैनल की ओर से आयोजित इंसेफेलाइटिस जागरूकता शिविर में मुख्यमंत्री ने कहा कि चार दशक पूर्व इस बीमारी से मौत का आंकड़ा 1000 के पार पहुंच जाता था। इस क्षेत्र के लिए यह बीमारी अभिशाप बन चुकी थी। बीमारी ने 1977-78 में ही पांव पसार लिए थे, लेकिन गोरखपुर मेडिकल कॉलेज ने 1988 में आधिकारिक तौर पर इस बीमारी की जानकारी दी।
सीएम ने कहा कि मासूमों का दर्द देख उन्होंने सड़क से संसद तक मामले को उठाया। योगी आदित्नाथ ने कहा कि वर्ष 2004-05 में इंसेफेलाइटिस पर अंकुश के लिए टीकाकरण शुरू हुआ, जिससे बीमारी का प्रकोप कुछ कम हुआ।
भाजपा की सरकार बनने के बाद इंसेफेलाइटिस की रोकथाम के लिए कारगर कदम उठाए गए। प्रदेश के 38 जिलों में इंसेफेलाइटिस से पीड़ित मरीजों के इलाज के लिए बेहतर इंतजाम किए गए हैं। इस कार्य में कई विभाग शामिल किए गए हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, बाल विकास, नगरीय निकायों की जिम्मेदारी तय की गई है। बीआरडी समेत अन्य मेडिकल कॉलेजों में चिकित्सा सुविधाएं बढ़ाई गई हैं। वर्ष 2017 में गोरखपुर मंडल में इंसेफेलाइटिस के 86 मरीज मिले थे, जिनमें से छह की मौत हुई थी।
मुख्य्मंत्री ने कहा कि बीमारी की रोकथाम के लिए जागरूकता अभियान शुरू किया गया, जो अब जन आंदोलन बन चुका है। शहर से गांव तक लोगों को बताया जा रहा है कि शुद्ध पेयजल के सेवन और स्वच्छता से इस बीमारी पर अंकुश संभव है। स्वच्छता भाजपा सरकार के एजेंडे में टॉप पर है। इसके तहत प्रदेश में एक करोड़ 60 लाख शौचालय बनवाए जा चुके हैं। बीमारी की रोकथाम को सरकार हरसंभव प्रयास कर रही है। अगर आप सभी घर-बाहर साफ-सफाई रखें तो इंसेफेलाइटिस पर पूरी तरह से रोक लग जाएगा।