इसे ग्रामीणों की जागरूकता में कमी कहेंगे अथवा कुछ और। स्वच्छता अभियान के तहत गांवों में जो शौचालय बनाए गए हैं, ग्रामीण उसका उपयोग भेड़-बकरी बांधने और कंडे रखने के लिए कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विशेष पहल पर स्वच्छता अभियान की शुरूआत दो वर्ष पहले हुई। ग्रामीण क्षेत्रों में अभियान को सफल बनाने की जिम्मेदारी जिलों के विकास भवन को सौंपी गई और प्रति शौचालय निर्माण के लिए 12 हजार रुपये की धनराशि तय की गई। करोड़ों रुपये खर्च करके करीब 50 हजार शौचालयों का निर्माण भी कराया गया, जिसके उपयोग की जिम्मेदारी ग्रामीणों की हैं। मगर ग्रामीण हैं, शौचालय का उपयोग नहीं कर रहे हैं।
इस पर अफसरों ने गांवों में पहुंचकर ग्रामीणों से बात की तो ग्रामीणों ने जवाब दिया कि उनकी खेत में जाने की आदत पड़ी हुई है। आंधी-पानी आने पर बचाव के लिए जानवरों को बांध देते हैं, जिसकी रिपोर्ट संयुक्त विकास आयुक्त के मंडलीय दफ्तर ने शासन को भेजी है। रिपोर्ट में बताया है कि शौचालय बनाए जाने के साथ ही ग्रामीणों के विचारों को भी बदलने की आवश्यकता है। जब ग्रामीण जागरूक होंगे, तब ही स्वच्छता अभियान की सार्थकता सिद्ध होगी।
ग्रामीण क्षेत्रों में बनाए गए शौचालयों में ग्रामीण भूसा-कंडा रख रहे हैं। भेड़-बकरी बांध रहे हैं। करीब 80 फीसदी शौचालय का उपयोग नहीं हो रहा है, जिसकी रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है।
- गोविंद लाल श्रीवास्तव, संयुक्त विकास आयुक्त, गोरखपुर मंडल