मेडिकल कॉलेज में इंसेफेलाइटिस वार्ड का निरीक्षण करते केन्द्रीय टीम के डॉक्टर।
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पूर्वांचल के लिए महामारी बने इंसेफेलाइटिस के कारणों पर मंथन के लिए आई केंद्रीय टीम ने मेडिकल कॉलेज का दौरा किया। इस दौरान एक-एक मरीज के पास पहुंचकर टीम ने ब्यौरा जुटाया। टीम ने तीमारदारों से प्रारंभिक लक्षण और इलाज के लिए पहली बार मरीज को ले जाने वाले डॉक्टर के बारे में जानकारी ली। एक बार फिर झोला छाप डॉक्टरों का मामला सामने आया। टीम ने बीते साल जुलाई और अगस्त में हुई मौतों का रिकॉर्ड और भर्ती मरीजों के रीढ़ की हड्डी के पानी (सीआईएसएफ) सैंपल और ब्लड सैंपल मांगा है। टीम बृहस्पतिवार को भी जांच करेगी।
मंगलवार को टीम ने सीएमओ से मुलाकात की थी और उनसे बीमारी की वजह पर चर्चा की थी। बुधवार की सुबह दस बजे टीम मेडिकल कॉलेज पहुंची और 100 बेड के इंसेफेलाइटिस वार्ड, बाल रोग, लैब में जाकर गहन छानबीन की। टीम में एम्स के डॉक्टर भी शामिल हैं जो इस बीमारी की वजह को जानने का प्रयास कर रहे हैं। देर शाम तक मेडिकल कॉलेज में टीम मौजूद रही और लैब से लेकर वार्ड तक का हाल भी जाना। वेंटिलेटर के मॉनीटर कम होने पर टीम ने सवाल खड़े किए और एक कमरे में बंद पांच वेंटिलेटर को बाहर निकाला गया। बताया गया कि सभी खराब है मगर उसमें से दो मॉनीटर चालू हालत में मिले हैं। तकरीबन हर मरीज के तीमारदार ने ये बताया कि वह पहली बार इलाज के लिए नजदीकी झोलाछाप डॉक्टर के पास साधारण बुखार मानते हुए गए थे।
इन बिंदुओं पर ली जानकारी
पीने के लिए इस्तेमाल करने वाला पानी
घर के आसपास सुअर बाड़े
पहला लक्षण क्या दिखा और इलाज को कहां गए
मेडिकल कॉलेज में कब आएं