‘शेयरधारक 4.40 करोड़ हड़पकर फरार, बैंक प्रबंधन खामोश’
टीपी शाही
गोरखपुर। नगर सहकारी बैंक के निदेशक मंडल में कर्ज को लेकर घमासान मचा है। निदेशकों का आरोप है कि शेयरधारक बैंक के 4.40 करोड़ रुपये लेकर लापता हो गए। इसकी वापसी संभव नहीं है। इस मामले में बैंक प्रबंधन कुछ नहीं कर रहा है।
नगर सहकारी बैंक की निदेशक सत्यभामा शाही, बीना राव, शत्रुघ्न शाही, बृजेश सिंह और राधिका शाही ने बैंक के सचिव को एक पत्र लिखा है। निदेशकों का आरोप है कि नान परफार्मिंग एसेट्स (एनपीए) लगातार बढ़ता जा रहा है। कर्ज वसूली की प्रक्रिया शिथिल है। कई संदिग्ध व्यक्तियाें, सगे-संबंधियों को भी बैंक से कर्ज दिए गए हैं। एक व्यक्ति ने कारोबार के लिए कर्ज लिया था लेकिन वाहन खरीद लिया। अब कर्ज माफी का आवेदन कर दिया है। आरबीआई के दिशा-निर्देशों को दरकिनार करके वर्ष 1984 से 2017 के बीच कर्ज बांटा गया। इसकी वसूली अब नहीं हो सकेगी। कानूनी कार्रवाई भी नहीं हुई। कर्ज की रकम डूबने की नौबत है। यदि वसूली पुख्ता नहीं हुई तो बैंक बंदी की नौबत आएगी। तमाम लोगों की नौकरी चली जाएगी।
निदेशकों की तरफ से सचिव को भेजे गए पत्र के मुताबिक कर्जदार
कंपनी या व्यक्ति कर्ज की रकम (लाख में)
हिमालय ट्रेडर्स 10
अब्दुल मुईद 6.75
लाल कुमार 29
प्रताप ट्रेडर्स 25
लल्लन वारसी 1
वीपी ट्रेडर्स 3.50
दोस्त मोहम्मद 2
शाकिर अली 2.70
विवेक सिंह 25
भूपनारायण 40
अजय कुमार सिंह 11
उर्मिला शाही 12.50
अखिलेश सिंह 3.50
रवि राय 6
संजय गुप्ता 8
विशाल तूली 20
होम रिसोर्सेज 13
शमीम अहमद 6.50
श्याम बिहारी अग्रहरि 2.25
जगदीश प्रसाद 1.50
राणा प्रताप सिंह 3
कृष्णभान सिंह 30
संजय गुप्ता 20
सूर्यप्रकाश सिंह कौशिक 9
चंद्रिका प्रसाद वर्मा 50,000
कोट
बैंक ने 14 करोड़ लोन बांटा है। जो कर्ज लेता है, यदि तीन किस्त जमा नहीं करता है तो वह एकाउंट एनपीए हो जाता है। एनपीए उनके ही बैंक का नहीं बहुत से नेशनलाइज बैंकों का भी हुआ है। जो लोग रकम जमा नहीं कर रहे हैं उनके खिलाफ वसूली की विधिक कार्रवाई की जा रही है। बैंक के एक पूर्व अध्यक्ष ने 1.75 लाख कर्ज लिया था। कर्ज जमा नहीं कर रहे थे। 20 साल बाद उनसे पांच गुना ज्यादा कर्ज की रकम वसूली गई है। कुछ लोग बैंक पर कब्जे को लेकर षड़यंत्र रच रहे हैं। उनके आरोप निराधार हैं। बैंक स्थिति खराब होती तो लाभ में कैसे चल रहा है।
- अजय कुमार सिंह, सचिव, नगर सहकारी बैंक