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प्राइवेट बैंकों ने लगाई रजिस्ट्री विभाग को करोड़ों की चपत

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अमर उजाला एक्सक्लूसिव
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प्राइवेट बैंकों ने लगाई रजिस्ट्री विभाग को करोड़ों की चपत
अरुण चन्द
गोरखपुर। पंजीकृत बैनामा अभिलेख और संपत्तियों पर लोन देने के मामले में प्राइवेट बैंकों की गैरकानूनी कारगुजारी के चलते गोरखपुर निबंधन कार्यालय (रजिस्ट्री ऑफिस)को वित्तीय वर्ष 2018-19 में ही करीब छह करोड़ से अधिक के राजस्व का नुकसान हुआ है। निबंधन विभाग के आला अफसरों के मुताबिक प्रदेश के सभी जिलों में जांच हुई तो विभाग को राजस्व नुकसान का यह आंकड़ा 100 करोड़ से अधिक पहुंच सकता है। इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट शासन को भेजी जा रही है।
विभाग ने इसकी जांच शुरू कर दी है कि किन परिस्थितियों में प्राइवेेट बैंकों ने स्टांप संबंधी कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन किया। अभी तक की जांच में सिर्फ एक प्राइवेट बैंक (एचडीएफसी) से ही डेढ़ करोड़ के नुकसान के संकेत मिले हैं। इस कार्यप्रवृत्ति के पीछे प्राइवेट बैंकों की लापरवाही है या कोई साजिश,यह जांच मेें तय हो सकेगा। फिलहाल,आईसीआईसीआई, एक्सिस जैसे प्राइवेट बैंकों में भी लोन देने के मामले में ऐसी ही कार्यप्रवृत्ति पाई गई है। लिहाजा उनसे भी इस संबंध में कागजात तलब किए गए हैं। जिले स्तर पर भविष्य में इस राजस्व नुकसान को रोकने के प्रयास शुरू हो गए हैं।
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रजिस्ट्री विभाग के मुताबिक बैंक, जमीन-मकान जैसी संपत्ति के साथ ही पंजीकृत बैनामे के अभिलेख (डीड) पर भी लोन देता है। स्टांप एक्ट के तहत ऐसे किसी भी लोन को स्वीकृत करते समय लोन की धनराशि के मुताबिक पांच रुपये प्रति हजार से लेकर अधिकतम दस हजार रुपये की स्टांप ड्यूटी जमा करनी होती है। डीड बंधक रखने के मामले में बैंक कागजात तैयार कराता है और उसमें लोन की रकम के मुताबिक स्टांप लगाता है। वहीं, संपत्ति बंधक रखने के मामले में दोनों सुविधा होती है। मसलन या तो बैंक कागजात तैयार कराएगा (स्टांप ड्यूटी के साथ) या फिर कर्ज लेने वाला रजिस्ट्री दफ्तर में रजिस्ट्रेशन कराएगा, मगर डीड और संपत्ति दोनों पर ही लोन देने के मामले में ज्यादातर प्राइवेट बैंक की तरफ से सिर्फ 100 रुपये का स्टांप पेपर लगाकर खानापूरी कर दी जाती है। इसके विपरीत राष्ट्रीयकृत बैंकों की तरफ से इस नियम का पूरा पालन किया जाता है।
एचडीएफसी के 1781 मामले सामने आए
रजिस्ट्री विभाग की तरफ से शुरूआती जांच में सिर्फ एचडीएफसी से रिकार्ड तलब किए तो 1781 मामलों में स्टांप ड्यूटी में गड़बड़ी सामने आई। नमूने के तौर पर विभाग ने ऐसे लोन के पांच अभिलेख भी अपने पास रखे हैं। इसी तरह दूसरे सभी प्राइवेट बैंकों से विभाग ने रजिस्टर्ड डीड या संपत्ति पर लोन मामले की सूचना तलब की है। जांच के बाद देनदारी तय होने पर लोन लेने वालों को नोटिस भेजकर उनसे स्टांप ड्यूटी की संबंधित रकम जमा कराई जाएगी। इस मामले में एचडीएफसी का पक्ष जानने के लिए अमर उजाला ने गोरखपुर जोन के कलस्टर हेड संदीप कर से संपर्क करने की कोशिश की । फोन नहीं उठने पर उन्हें व्हाट्सएप के जरिए संदेश भी भेजा गया। उनका पक्ष जब भी आएगा, प्रकाशित किया जाएगा।
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कोट---
स्टांप एक्ट शेड्यूल फर्स्ट बी के आर्टिकल छह के मुताबिक रजिस्टर्ड डीड और संपत्तियों पर लोन देने पर पांच रुपये प्रति हजार और अधिकतम दस हजार रुपये का स्टांप जमा करने का नियम है। मगर राष्ट्रीयकृत बैंकों को छोड़ ज्यादातर प्राइवेट बैंक स्टांप के तौर पर यह रकम नहीं जमा कर रहे। गोरखपुर में सिर्फ एचडीएफसी बैंक के ही 1781 मामले में करीब डेढ़ करोड़ रुपये की गड़बड़ी सामने आ रही है। मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है। सभी प्राइवेट बैंक ों से ऐसे लोन की सूचना मांगी गई है। जांच रिपोर्ट शासन को भी भेजी जाएगी।: रामानंद सिंह, डीआईजी स्टांप, गोरखपुर
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