गोरखपुर। हिंदू-मुस्लिम एकता के प्रतीक सैयद सालार मसऊद उर्फ बाले मियां की लगन की रस्म रविवार को बहरामपुर स्थित उनके आस्ताने पर धूमधाम एवं अकीदत के साथ पूरी की गई। आस्ताने इंतजामियां कमेटी ने 10 मई को मुख्य मेला का दिन निर्धारित किया है।
सुबह से ही आस्ताने पर अकीदतमंदों का तांता लगा रहा। फर्ज की नमाज के बाद गुस्ल शरीफ की रस्म हुई। इसके बाद कुरआन ख्वानी की गई। दोपहर एक बजे लग्न की रस्म अदा की गई। इसके बाद शादी की तारीख (10 मई) तय की गई। इस मौके पर अकीदतमंदों ने नरकटिया, नकहा, बसंतपुर समेत तमाम मोहल्लों से जुलूस की शुक्ल में गागर एवं चादर के साथ आस्ताने पर पहुंचे। बैंड-बाजा और बग्घी जुलूस की शान बढ़ा रहे थे। पूरे ऐहतराम के साथ चादर व गागर आस्ताने पर पेश किया गया और अमन चैन की दुआएं मांगी। भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे।