क्षेत्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी केंद्र और आरपीएम एकेडमी ग्रीन सिटी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 27वीं राज्य स्तरीय राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस प्रतियोगिता का समापन शुक्रवार को विद्यालय प्रांगण में हो गया। तीन दिवसीय कार्यक्रम के दौरान प्रदेश के हर जिले से आए 274 बाल विज्ञानियों ने अपने प्रोजेक्ट के माध्यम से वैज्ञानिकता का परिचय देकर निर्णायकों का ध्यान खींचा। विभिन्न बाधाओं को पार करते हुए 42 बाल विज्ञानियों ने यूपी की टीम में जगह बनाई है। चयनित बाल विज्ञानी केरल में आयोजित राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस में यूपी का प्रतिनिधित्व करेंगे।
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समापन समारोह के मुख्य अतिथि डीएम के विजयेंद्र पांडियन ने प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र प्रदान किया। कहा कि जीवन का अर्थवान बनाएं तथा समस्या को खोजें व देश, समाज को एक दिशा देने का प्रयास करें। वास्तव में भगवान वहीं है जो हमें बचाता है। आप आइडिया तैयार करें और उसे संभव बनाएं। प्रो. बीबी उपाध्याय और प्रो. आरपी शुक्ला और प्रो. परमहंस पाठक ने बच्चों को वैज्ञानिक अवधारणा से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं।
धन्यवाद ज्ञापन आरपीएम एकेडमी के निदेशक अजय शाही ने किया। संचालन स्टेट कोआर्डिनेटर विवेक ने किया। इस अवसर पर भारत सरकार के वैज्ञानिक डॉ. बीके त्यागी, डॉ. दीपक शर्मा, नोडल अधिकारी सुरेश चंद्र शर्मा, क्षेत्रीय वैज्ञानिक अधिकारी महादेव पांडेय, डॉ. देवेंद्र शाह, वैज्ञानिक अधिकारी यशसी शर्मा, आरपीएम एकेडमी की प्रधानाचार्य आराधना शाही आदि लोग मौजूद रहे।
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आकाश दर्शन, साइंस वैन से समझीं विज्ञान की बारीकियां
क्षेत्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी केंद्र की ओर से आकाश दर्शन, साइंस वैन के साथ साथ अंधविश्वास को दूर करने के लिए विभिन्न तरह के स्टॉल विद्यालय परिसर में लगाए गए थे। विद्यार्थियों ने इनकी मदद से विज्ञान की बारीकियाें को सीखा।
नेशनल प्रतियोगिता के लिए चुने गए यूपी के मेधावी
जूनियर वर्ग में ऋषभ यादव, विक्रांत पांडेय, आरजू, ओजस्वी, कौशिकी रश्मि, ज्योति यादव, शशिकांत वर्मा, जीवा सिंह, मानसी चौहान, आर्यन मौर्या, आदर्श पति त्रिपाठी, अन्वेषा श्रीवास्तव। सीनियर वर्ग में अहमद अराफात, शीन स्वरूप, अनंदिता विश्वास, जागृति परिहार, वर्तिका सिंह, जयंती श्रीवास्तव, सुमित बघेल, मोनार्क भारद्वाज, चिराग त्यागी, बंटी राय, अदित्री नरुला, खुशी तायल, रिया चौहान, सचिन कसौधन, खुशी राठी, अन्मा कमला फारुकी, सदफ, प्रियांशी सिंह, प्रशांत कुमार, अमर्त्य सिंह, आदित्य द्विवेदी, मुकुंद कुमार, शाश्वत सत्संगी, आशीष कुमार, नंदिनी, दीक्षा यादव, आशु यादव, नीदा, प्रांजल अग्रवाल और सूर्यांश गुप्ता।
मंदिर से निकलने वाले अपशिष्ट से इत्र तैयार करने का फार्मूला
मथुरा के रहने वाले मोनार्क भारद्वाज ने ब्रज के मंदिरों से निकलने वाले फूलों के अपशिष्ट से इत्र तैयार करने की विधि पर अपनी रिपोर्ट बनाई है। उनका दावा है कि इसमें लागत नहीं के बराबर ही जाएगी। थोड़ी सी जागरूकता से ही मंदिर में चढ़ाए जाने वाले फूलों से इत्र को तैयार किया जा सकता है। मथुरा के कुछ मंदिरों ने उनके प्रोजेक्ट में दिलचस्पी भी दिखाई है। गाइड टीचर अमित तायल ने बताया कि इसे आय बढ़ाने के एक विकल्प के रूप में भी आजमाया जा सकता है।
गाजियाबाद की रहने वाली रोहिणी पर लोगों के अंदर छिपे अंधविश्वास को दूर करने की ऐसी खुमारी है कि उन्हें जैसे ही ढोंगियों की ओर से फैलाए जाने वाले मकड़जाल की जानकारी मिलती है वो फौरन वहां पहुंच जाती हैं। कई दफा तो उन्हें विरोध का भी उन्हें सामना करना पड़ता है। मगर विज्ञान के तर्क पूर्ण तथ्यों से ये बिटिया वहां के लोगों को जागरूक करती है।
आरपीएम एकेडमी ग्रीन सिटी में आयोजित राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस में हिस्सा लेने पहुंची रोहिणी गोले लोगों में विज्ञान के प्रति जागरूकता पैदा करने के लक्ष्य से वर्ष 2010 से ही प्रगति विज्ञान संस्थान से जुड़ी हैं। अमर उजाला से बातचीत में रोहिणी ने बताया कि ढोंगियों के निशाने में अक्सर ग्रामीण अंचल में रहने वाली महिलाएं होती है।
उन्हें हाथों की जादूगरी दिखाकर ये सारी कमाई परिवार की सुरक्षा का डर दिखाकर ऐंठ लेते हैं। ये संस्थान लोगों के अंदर के अंधविश्वास को दूर करने के लिए काम करता है। रोहिणी नौ वर्षों से लगातार इस संस्थान से जुड़कर लोगों के अंदर छिपकर बैठे अंधविश्वास को दूर कर रही हैं। उनके प्रयासों को देखते हुए वर्ष 2014 में प्रदेश सरकार ने उन्हें यूपी मलाला एवार्ड से पुरस्कृत किया है।