मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ के शहर गोरखपुर में स्थित मेडिकल कॉलेज के पोस्टमार्टम हाउस के पास बने तीन कमरों में करीब 15 हजार लोगों की मौत की वजह जानने के लिए रखा गया विसरा बंद है। करीब 22 सालों से न ही इसे नष्ट किया गया है और न ही उसकी जांच कराकर रिपोर्ट मंगाने की कोई सुध ली गई।
जो मामले सुर्खियों में होते हैं उसकी पुलिस पैरवी कर विसरा को जांच के लिए भेजवाती है। लगातार पैरवी के बाद कहीं एक साल में रिपोर्ट आ पाती है। वह भी बीच में अफसर बदले तो जांच की फाइल भी धीरे से बंद हो जाती है।
जिन मामलों में मौत की वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट से स्पष्ट नहीं होती उसमें डॉक्टर मृतक का विसरा सुरक्षित कर देते हैं। यहीं से शुरू होता है इंतजार। चर्चित मामलों में ही रिपोर्ट आने में साल भर तक लग जाता है। लावारिस मिलने वाले शवों की तो दशक गुजर जाने के बाद भी रिपोर्ट नहीं आ पाती है।
विडंबना यह भी है कि जांच के लिए विसरा विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजने के बाद पुलिस की पड़ताल भी अटकी रहती है। वहीं, कई ऐसे भी मामले होते हैं जिनमें विधि विज्ञान प्रयोगशाला से रिपोर्ट तो आ जाती है लेकिन मौत की वजह स्पष्ट नहीं होती है। ऐसी रिपोर्ट ज्यादातर आत्महत्या और अज्ञात शव मिलने के मामलों में आती है।
पुलिस के अनुसार, जिन व्यक्तियों के शरीर पर चोट आदि का निशान नहीं होता और पोस्टमार्टम में उनकी मौत का कारण स्पष्ट नहीं होता। डॉक्टर उनका विसरा सुरक्षित कर देते है। इसके बाद विसरा को बोतल में बंद कर रख दिया जाता है, जिस मामले में पुलिस पैरवी करती है सिर्फ उन्हीं विसरा को जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जाता है।