बड़े नोटों पर बैन के बाद इन्हें बदलने और खातों में जमा करने के लिए शनिवार को भी लोग बेचैन दिखे। सुबह ही लोग बैंकों एवं डाकखानों की ओर निकल पड़े। इससे वहां लंबी कतार लग गई। दूसरी ओर एटीएम से कैश निकालने की हसरत में लोगों को परेशानी झेलनी पड़ी। लोग एक से दूसरे एटीएम के चक्कर लगाते दिखे, लेकिन ताला बंद देखकर लोगों को निराश होकर लौटना पड़ा।
सरकार के दावे के मुताबिक नोट बदलने और इन्हें जमा करने की व्यवस्था अभी भी बन नहीं पाई है। तीन दिनों से दुश्वारी झेल रहे लोग अब तक बैंक और डाकघरों में व्यवस्था पटरी पर न आने पर नाराज दिखे। लोगों ने कहा कि जब रात के 12 बजे बड़े नोट बैन किए जा सकते हैं तो फिर एटीएएम में इस तेजी से कैश क्यों नहीं डाले जा सकते। अधिकतर बैंक शाखाओं में कैश की कमी के चलते वहां नोट बदलने पहुंचे लोगों को निराशा हाथ लगी। छोटे डाकखानों का भी ऐसा ही हाल था। इसके चलते एसबीआई की मुख्य शाखा, प्रधान डाकघर एवं विभिन्न बैंकों के मंडल मुख्यालय पर लोगों की भारी भीड़ उमड़ी। इसके चलते व्यवस्था संभालने में पुलिस कर्मियों एवं स्टाफ को मशक्कत करनी पड़ी।
एसबीआई मुख्य शाखा पर आलम ऐसा था कि लोगों की कतार गेट तक पहुंच गई। चार लोग भीतर से नोट बदलकर बाहर आते थे तो बाहर से चार को सुरक्षा कर्मी भीतर भेज रहे थे। शुक्रवार को एटीएम की बदहाली से दो-चार हुए लोग रकम निकालने के लिए सुबह बैंकों पर पहुंचे तो भीड़ देखकर हिम्मत जवाब दे गई। ऐसे लोगों ने दोबारा एटीएम की ओर रुख किया। हालांकि, शहर के ज्यादातर एटीएम शनिवार को भी बेकार रहे। जहां कैश था, वहां पूरे दिन लोगों की लंबी कतार लगी रही।