फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

‘साहब कब ठीक होई हमार बेटी’

Sat, 01 Oct 2016 09:11 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
विज्ञापन
इंसेफेलाइटिस वार्ड में मरीजों का हाल लेते मंत्री। - फोटो : Shivharsh Dwivedi
विज्ञापन
‘साहब कई दिन से बेटी भर्ती है, कोई बता नहीं रहा कि कब ठीक होई, आपे बता दीं कि हमार बेटी कब तक ठीक हो जाई।’ यह दर्द एक पिता का था। पिता ने यह सवाल केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री से किया। वह शनिवार को सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक के शिलान्यास से पहले इंसेफेलाइटिस वार्ड का निरीक्षण करने पहुंचे थे। बिहार की अनु बेड नंबर 32 पर कई दिनों से भर्ती है। केंद्रीय मंत्री उसके पास व्यवस्थाओं का हाल जानने पहुंचे थे। पिता का सवाल सुनकर कुछ देर तक सभी लोग वहीं ठहर गए।
विज्ञापन


मंत्री ने उन्हें सांत्वना दी और सब कुछ ठीक हो जाने का भरोसा दिलाया। उन्होंने दवा, इलाज में कोई कमी न करने का निर्देश दिया और डॉक्टरों से मरीज की निगरानी करने के लिए कहा। इसके बाद वह सीधे बेड नंबर 38 पर पहुंचे, यहां पडरौना के मनीष भर्ती थे। यहां भी मंत्री ने व्यवस्थाओं के बारे में सवाल किया। मनीष के घर वालों ने बताया कि मजबूरन उन्हें हैंडपंप का पानी पीना पड़ता है। प्राचार्य ने बताया कि 80 फीसदी बच्चे एईएस के हैं, जिसकी प्रमुख वजह गंदा पेयजल है। प्राचार्य ने गिनाई कमियां, मांगे 30 करोड़ मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. राजीव मिश्र ने केंद्रीय मंत्री के सामने कई कमियां गिनाईं। बताया कि मानव संसाधन की कमी है, दवा के मद में आठ करोड़ मांगा गया था, मगर छह करोड़ ही मिला। एनआईसीयू के लिए सात करोड़ की मांग की गई, मगर नहीं मिल सका। उन्होंने व्यवस्थाओं के सुधार के लिए तीन करोड़ की जरूरत होने की बात कहते हुए रकम की मांग की। उन्होंने बताया कि संविदा पर तैनात 378 डॉक्टर और कर्मचारियों के लिए केंद्र सरकार से कॉलेज ने 14 करोड़ रुपये मांगे थे मगर सिर्फ आठ करोड़ रुपये ही मिल सके। हालांकि, मंत्री ने सभी के समाधान का आश्वासन दे दिया है।  रैन बसेरा की मिलेगी अनुमति : राधेश्याम  प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा एवं कृषि मंत्री से प्राचार्य ने रैन बसेरा की अनुमति मांगी। इस पर राधेश्याम सिंह ने एयरपोर्ट अथॉरिटी की ओर से आठ करोड़ रुपये से प्रस्तावित रैन बसेरे को जल्द मंजूरी का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में जबसे सपा की सरकार है तब से मेडिकल कॉलेजों की संख्या में तेजी से बढ़ोत्तरी हुई। वर्ष 2012 तक सूबे में महज सात कॉलेज थे। अब इनकी संख्या बढ़कर 13 हो गई है। पांच मेडिकल कॉलेज और खोले जाने हैं। इसके अलावा तीन मेडिकल कॉलेजों का निर्माण शुरू हो चुका है। 
विज्ञापन
कई संगठनों ने दिए ज्ञापन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को संविदा कर्मचारियों के अलग-अलग संगठनों ने ज्ञापन सौंपा। संयुक्त नर्सेज वेलफेयर एसोसिएशन के मंडल अध्यक्ष सूरज गुप्ता ने महिला कर्मचारियों को मातृत्व व आकस्मिक अवकाश, समान कार्य-समान वेतन और एजेंसी हटाने की मांग की। मंत्री ने कहा कि उन्हें उनका पूरा हक दिया जाएगा। अफसरों से भी बात की जाएगी। इंसेफेलाइटिस वार्ड में तैनात संविदा कर्मचारी शशिबाला हेनरी, सूर्य प्रकाश पांडेय ने भी समान कार्य के बदले समान वेतन की मांग की। उन्होंने कहा कि वार्ड 14 में तैनात संविदा कर्मचारियों के सापेक्ष वार्ड 12 और वार्ड 100 बेड के संविदा कर्मचारियों को काफी कम मानदेय दिया जा रहा है, जबकि इन दोनों वार्डों में काम कई गुना ज्यादा है। एनएचएम संविदा कर्मचारी संघ ने भी अध्यक्ष उपेंद्र यादव की अगुवाई में केंद्रीय मंत्री से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने विभाग के नियमित पदों पर संविदा कर्मचारियों को सीधा समायोजित करने की मांग की। आशा के दो अलग-अलग गुटों ने भी केंद्रीय मंत्री को ज्ञापन देकर मानदेय निर्धारित करने की मांग की।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें