गोरखपुर। सुबह से ही श्रद्धालुओं की चहल-पहल, मां लक्ष्मी के गूंजते भजन। यह दृश्य था छोटी दिवाली पर बुधवार सुबह लक्ष्मी पूजा पंडालों का। दिन भर की तैयारियों के बाद शाम को वैदिक मंत्रोच्चार व जयकारे के साथ शहर के सभी पंडालों में मां की प्रतिमा के समक्ष पूजन के बाद देवी के नयन पट खोल दिए गए। दूसरी ओर घरों पर लोगों ने पूजा आराधना के बाद दीपदान करके छोटी दिवाली मनाई।
लक्ष्मी पूजा समितियों की तैयारियों में कोई कोर-कसर न रह जाए इसके लिए पूरे दिन तैयारियां की गईं। पंडालों में बजते देवी गीत माहौल को भक्तिमय बना रहे थे। शाम होते ही वैदिक मंत्र गूंजने लगे और मां की आराधना शुरू हो र्गई। असुरन चौक, घोष कंपनी, हजारीपुर, बेतियाहाता, रुस्तमपुर, आजाद नगर, धर्मशाला, बसंतपुर, हांसूपुर, माया बाजार, बौलिया कॉलोनी, बिछिया कॉलोनी आदि में सजे पंडालों में स्थापित की गई देवी प्रतिमाओं की पूजा हुई। घंटाघर के पास उर्दू बाजार में सजा लक्ष्मी पूजा पंडाल अपनी भव्यता के कारण लोगों को आकर्षित कर रहा है। दूसरी ओर नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली) पर लोगों ने घर में पूजन के बाद दीपदान किया। वहीं मंगलवार रात को झरना टोला स्थित दुर्गा मंदिर में दिवाली के उपलक्ष्य में भगवती जागरण का आयोजन हुआ। मेयर डॉ. सत्या पांडेय मुख्य अतिथि रहीं। इस दौरान चंदन, सुदीप सागर, सुधीर, मोनू निषाद, विनोद कुमार आदि मौजूद रहे।
दिन में भी कर सकते हैं लक्ष्मी पूजन
गोरखपुर। बृहस्पतिवार को सूर्योदय 6.21 बजे से अमावस्या शुरू हो रही है। अमावस्या का मान रात तीन बजकर दो मिनट तक है। दिन में 3.59 के बाद तुला लग्न शुरू हो जाएगी। दिवाली के लिए तुला लग्न में स्थित चंद्रमा अत्यंत शुभ फलदायक माना गया है। बृहस्पतिवार को दिवाली होने के कारण बौद्घिक जगत से जुड़े व्यक्तियों के लिए इसका फल अत्यंत उत्तम होगा।
आचार्य पंडित शरद चंद्र मिश्र के अनुसार दिवाली पर वृहस्पतिवार को दफ्तरों में पूजन के लिए शुभ मुहूर्त प्रात: 6.21 से शुरू हो जाएगा। 6.21 से 7.46 तक शुभ बेला, 10.36 से 12 बजे तक चर बेला, 12.01 से 1.25 तक लाभ बेला, 1.26 से 2.50 तक अमृत बेला में लक्ष्मी पूजन किया जा सकता है। घरों एवं व्यावसायिक प्रतिष्ठानाें में सायंकाल 5.40 से 8.12 तक प्रदोष बेला, 6.59 से 8.55 तक वृष लग्न में दीपदान एवं लक्ष्मी पूजन, कुबेर पूजन, बही-खाता पूजन, धर्म एवं घर में दीप जलाना ब्राह्मणों एवं आश्रितों को उपहार बांटना शुभ फलदायक है। निशीथ काल 8.13 से 10.45 तक है। आचार्य मिश्र ने बताया कि इस अवधि में श्रीसूक्त पाठ, कनकधारा स्त्रोत पाठ एवं लक्ष्मी स्त्रोत का पाठ उत्तम होगा। तंत्र साधना के लिए महानिशीथ काल रात्रि 10.46 से 1.17 तक उत्तम होगा। इस अवधि में महाकाली उपासना, यंत्र-मंत्र सिद्घि एवं तंत्रादि क्रियाएं व साधनाएं की जाती हैं। रात में 1.27 से 3.02 तक सिंह लग्न होगा। यह काल लक्ष्मी पूजन समेत समस्त उपासना के लिए उत्तम है।