गोरखपुर। नगर निगम में फर्जी एफडी लगाकर टेंडर लेने के बाद अब नया घपला सामने आया है। ठेकेदार ने कर्मचारियों की मिलीभगत से टेंडर निकलने के बाद सिक्योरिटी राशि की एफडी ही नगर निगम से निकाल ली, जबकि नियमों के मुताबिक काम पूरा होने के बाद ही सिक्योरिटी राशि वापस ली जा सकती है। डिवाइडर निर्माण की फाइलों की जांच के दौरान यह धांधली पकड़ी गई।
कुछ ही महीने पहले नगर निगम के ठेकेदारों द्वारा ठेका हासिल करने के लिए फर्जी एफडी इस्तेमाल करने का मामला प्रकाश में आया था। जांच में दो दर्जन से ज्यादा ठेकेदार इस मामले के दोषी पाए गए थे। उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के साथ ही उन्हें ब्लैक लिस्ट में डाल दिया गया था। इसके बाद भी नगर निगम कर्मचारियों की मिलीभगत से ठेकेदारों की हेरफेर जारी है। डिवाइडर की फाइलों की जांच में सिक्योरिटी की एफडी निकालने का मामला पकड़ा गया है। टेंडर मंजूर होने के बाद स्वीकृत फर्म की फाइलों में से एफडी गायब मिली। प्रावधान है कि टेंडर डालने के दौरान ठेकेदार को कुल राशि की दस फीसदी की एफडी नगर निगम में जमा करनी होती है। जिन्हें ठेका नहीं मिलता है उनकी एफडी वापस कर दी जाती है। लेकिन डिवाइडर बनाने के पांच टेंडरों की फाइलें गायब मिलीं। ये टेंडर अक्टूबर में डाले गए थे, जिनकी सिक्योरिटी राशि चार लाख रुपये थी। माना जा रहा है कि इसमें निगम के किसी कर्मचारी या अवर अभियंताओं की मिलीभगत से ठेकेदारों ने एफडी निकाल ली है।
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निर्माण कार्य के टेंडर निकालने से लेकर भुगतान होने तक की जिम्मेदारी तय है। फिर भी फाइल से एफडी गायब होने की बात सामने आई है। मामले की तहकीकात करके आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
राजेश कुमार त्यागी, नगर आयुक्त