गोरखपुर।
बीआरडी कांड के बाद प्राइवेट प्रैक्टिस को लेकर सख्त हुए कमिश्नर अनिल कुमार ने सभी सरकारी डॉक्टरों को निर्देश दिया है कि वे शपथ पत्र देकर यह सुनिश्चित करें कि वे प्राइवेट प्रैक्टिस नहीं कर रहे। उन्होंने मंडल के सभी सीएमओ को निर्देश दिया कि वे प्राइवेट प्रैक्टिस करने वाले सरकारी डॉक्टरों के साथ ही शपथ देने वाले डाक्टरों की भी जांच करें कि वे प्राइवेट प्रैक्टिस तो नहीं कर रहे।
उन्होंने सीएमओ हर महीने औचक निरीक्षण कर इसकी जांच रिपोर्ट उन्हें उपलब्ध कराने को कहा। गोरखपुर के सीएमओ डॉ रविंद्र ने बताया कि जिले के 80 फीसदी सरकारी डॉक्टरों ने शपथ पत्र देकर प्राइवेट प्रेक्टिस नहीं करने का दावा किया है। इसपर कमिश्नर ने चेताया कि प्रशासनिक अफसरों की जांच में अगर कोई सरकारी डॉक्टर प्राइवेट प्रैक्टिस करते हुए पाया गया तो इसकी जिम्मेदारी सीएमओ की भी होगी। कमिश्नर सोमवार को मंडल में स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने चिकित्सकों की उपस्थिति, प्राइवेट प्रेक्टिस पर रोक, सीएचसी/पीएचसी पर उनकी तैनाती, दवाओं की उपलब्धता, विभिन्न घातक बीमारियों के इलाज का हाल जाना। निर्देश दिया कि सभी डीएम भी अपने जिलों की स्वास्थ्य सेवाओं की नियमित मानीटरिंग करें।
59 डॉक्टर मिले नदारद
गोरखपुर। समीक्षा के दौरान कमिश्नर ने बताया अगस्त महीनें में विभिन्न अफसरों के निरीक्षण में 59 डाक्टर बिना सूचना के जिला अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्रों पर अनुपस्थित पाये गये। उन्होंने कहा कि सभी पर कार्रवाई की जा रही है मगर सीएमओ खुद हर सप्ताह सीएचसी/पीएचसी का आकस्मिक निरीक्षण कर डाक्टर एवं स्टाफ की उपस्थिति सुनिश्चित करायें। उन्होंने बाढ़ और इंसेफेलाइटिस प्रभावित गांवों में दवाओं के छिड़काव और इंडिया मार्का हैंडपंप के मरम्मत कार्य पर असंतोष जताते हुए इसमें तेजी लाने के निर्देश दिए ।