गोरखपुर। बीआरडी कांड के आरोपी डॉ. सतीश कुमार ने सोमवार को कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया। प्रभारी विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम शिवानंद सिंह ने डॉ. सतीश को न्यायिक अभिरक्षा में तीन दिन के लिए जेल भेज दिया। अब डॉक्टर सतीश जेल से 13 सितंबर को कोर्ट में पेश किए जाएंगे। उसी दिन इस मामले के विवेचक को भी तलब किया गया है। डॉ. सतीश बीआरडी कांड में पांचवें आरोपी हैं जो जेल भेजे गए हैं।
ऑक्सीजन की कमी के बीच बच्चों की मौत के मामले में नामजद नौ आरोपियों में शामिल डॉ. सतीश कुमार की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमें लगी थीं लेकिन उन्हें पकड़ पाने में सफलता नहीं मिल सकी। इसी बीच उनके वकील ने कोर्ट में आत्मसमर्पण को अर्जी दी थी लेकिन कानूनी दांवपेंच के चक्कर में वह आत्मसमर्पण नहीं कर सके थे। इस पर कोर्ट ने केस संबंधी पत्रावली तलब कर 11 सितंबर की तारीख तय की थी। सोमवार को दीवानी कचहरी पहुंचकर डॉ. सतीश ने आत्मसमर्पण कर दिया। करीब 15 दिन पहले भी उनके आत्मसमर्पण करने की चर्चा थी। इसी देखते हुए फोर्स की तैनाती भी की गई थी लेेकिन डॉ. सतीश कोर्ट पहुंचे ही नहीं। कोर्ट के आदेश के बाद सोमवार को जेल में डॉ. सतीश को दाखिल करा दिया गया।
डॉ. सतीश को सरकारी गवाह भी बना सकती है पुलिस
निलंबित प्रिंसिपल डॉ. राजीव मिश्रा समेत नौ आरोपियों के खिलाफ दर्ज केस में डॉ. सतीश कुमार की गिरफ्तारी पर ही पुलिस ने नरमी बरती है। कानून के जानकार बताते हैं कि पुलिस उन्हें सरकारी गवाह भी बना सकती है क्योंकि पुलिस के पास कोई गवाह प्रत्यक्ष रूप से सामने नहीं आया है। सिर्फ कुछ कर्मचारियों ने ही शपथ पत्र दिए हैं। चर्चा यह भी है कि कोर्ट में आत्मसमर्पण की सूचना के चलते पुलिस ने ज्यादा सक्रियता नहीं दिखाई। सात सितंबर को भी वह कोर्ट में आकर आत्मसमर्पण किए बिना ही लौट गए थे। पुलिस ने उस दिन भी घेरेबंदी नहीं की थी। ये ऐसे संकेत हैं जो सरकारी गवाह की रणनीति की ओर इशारा कर रहे हैं। हालांकि अभी पुलिस अफसर इस पर खुलकर कुछ नहीं बोल रहे।
स्टॉक प्रभारी व एनेस्थीसिया विभाग के हेड थे डॉ. सतीश
थाने में दर्ज केस के मुताबिक ऑक्सीजन की सप्लाई का जिम्मा डॉ. सतीश कुमार का ही था। डॉ. सतीश ऑक्सीजन की उपलब्धता संबंधित व स्टॉक आदि के प्रभारी थे, लेकिन उन्होंने लॉग बुक चेक नहीं किया। कर्मचारी के भरोसे काम छोड़ रखा था। बीआरडी कांड के बाद वह बिना सूचना के 11 अगस्त को मुंबई चले गए थे। वह एनेस्थीसिया विभाग के अध्यक्ष भी थे।
डॉ. सतीश पर इन धाराओं में दर्ज है केस
गुलरिहा थाने में दर्ज केस के मुताबिक शाहपुर निवासी डॉ. सतीश कुमार पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, आपराधिक साजिश, 15 मेडिकल काउंसिल एक्ट, 66 आईटी अधिनियम, मानव वध की कोशिश, धोखाधड़ी, लोकसेवक द्वारा आपराधिक कृत्य की धाराओं में मुकदमा दर्ज है।
ये आरोपी अब भी हैं फरार
पुष्पा सेल्स के मालिक मनीष भंडारी, चीफ फार्मासिस्ट गजानन जायसवाल, संजय त्रिपाठी और उदय।
ये जा चुके हैं जेल
निलंबित प्रिंसिपल डॉ. राजीव मिश्रा, उनकी पत्नी डॉ. पूर्णिमा शुक्ला, डॉ. कफील खान, डॉ. सतीश कुमार, लिपिक सुधीर पांडेय
थाने से रिपोर्ट न आने पर लौट गए थे डॉ. सतीश
छह सितंबर को डॉ. सतीश के वकील ने कोर्ट में आत्मसमर्पण की अर्जी दी थी। वह सात सितंबर को कोर्ट में पहुंचे भी थे लेकिन गुलरिहा थाने से केस संबंधी पत्रावली ही नहीं आ सकी थी। इस वजह से डॉ. सतीश आत्मसमर्पण नहीं कर सके थे। कोर्ट ने इसे गंभीरता से लेते हुए थानेदार व पैरोकार को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए 11 सितंबर को पत्रावली के साथ तलब किया था। पत्रावली आने के बाद ही डॉ. सतीश कोर्ट में पहुंचे जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।